THE PHOTON NEWS EXCLUSIVE : रांची: ...हां सर, जरा होल्ड कीजिए एक जरूरी कॉल आ रहा है…, अरे यार दूसरे नंबर पर थोड़ी देर में बात करना, अभी विजी हूं। मंगला के आव-भाव देख साथ में बैठे राजेश्वर लाल दंग हैं। हर मिनट पर कॉल आ रहा। वह भी कोई ऐरे गैरे का नहीं, बल्कि बड़े-बड़े हकीम, हुक्मरान एवं कई जनप्रतिनिधियों का भी। वह किसी का भी फोन होल्ड कर दे रहा है।
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कुछ को तो सीधे डपट दे रहा है – फोन रखिए। बाद में बात करूंगा। राजेश्वर लाल उससे मिलने आए हैं। वह प्रतिष्ठित बिजनेसमैन हैं। अच्छा सा घर, नौकर जाकर भी। लेकिन ऐसी रुतबा नहीं, जैसे की मंगला की एक माह में अचानक बन आई है।
पहले ऐसे थे हालात
दरअसल, मंगला और राजेश्वर लाल एक ही स्कूल में पढ़ते थे। आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद मंगला मजदूरी करने शहर आ गया। एक गैस एजेंसी में डिलीवरी ब्वाय के रूप में काम करने लगा। जाड़ा, गर्मी, बरसात- हर मौसम में लगभग 30 किलो का सिलेंडर कंधे पर उठाकर घर-घर पहुंचाता था।

कभी-कभी तो सिलेंडर कंधे पर लेकर तीसरी मंजिल तक चढ़ता। दरवाजे की घंटी बजाता तो अंदर से आवाज आती- वहीं रख दो। पैसा ऑनलाइन डाल दे रही हूं। कई बार तो दरवाजा भी नहीं खुलता था।
नाम बदल गया, शान बदल गई
लेकिन आज हर चीज बदल गई है। उसका नाम बदल गया है… शान बदल गई है और काम भी बदला-बदला है। मंगला अब मंगलेश्वर नारायण कहलाने लगा है। हाथ में तीन मोबाइल लेकर चलता है।
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वह बताता है – पहले कोई सीधे मुंह बात नहीं करता था। अब लोग उसका इंतजार करते हैं। बार-बार कॉल करते हैं। भैया, निकले…, कहां पहुंचे हैं। कितनी देर लगेगी। अब उसका रूतवा बढ़ गया है। कहीं-कहीं तो घर पर पहुंचते ही लोग चाय के साथ पकौड़े का भी ऑफर देने लगे हैं।
खोया प्यार भी करने लगा ताक-झांक
मंगला बताता है- पहले वह गांव में एक लड़की से प्यार करता था। लेकिन लड़की कभी उससे बात नहीं करती थी। प्यार, इश्क, मोहब्बत सब एकतरफा था। लेकिन अब अचानक उसका खोया प्यार उमड़ आया है। लड़की का कॉल भी आता है… मेरी मौसी की बेटी की ननद वहीं रहती है। उसे एक सिलेंडर दे दीजिएगा।

मंगला जानता है कि उस लड़की का प्यार हालात और जरूरत पर आधारित है। लेकिन उसके लिए उसका फोन आना ही बहुत मायने रखता है।
गांव में उसके परिवार की कोई प्रतिष्ठा नहीं थी। लेकिन आज मुखिया एवं पार्षद भी उसके घर पहंचते हैं। हालचाल लेते हैं। फिर उसके पिता से नंबर लेकर उसे कॉल करते हैं-बेटा मंगल! तुम्हारा छोटा भाई शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा है। उसकी गैस खत्म हो गई है, एक सिलेंडर का इंतजाम कर देना।इस बीच एक नव निर्वाचित पार्षद का कॉल आता है। इधर से जवाब देता है…थोड़ी देर में कॉल कीजिए… अभी कुछ अधिकारी आए हुए हैं, बिजी हूं।
पावर ऐसा कि किसी के घर का चूल्हा ठंडा कर दे
उसकी ठसक देख राजेश्वर लाल पूछ बैठते हैं …यार, मेरे पास बंगला, गाड़ी, बिजनेस – सब है, फिर मेरा इतना कॉल नहीं आता। तुम्हारे पास ऐसा क्या है कि अभी बड़े-बड़े अधिकारियों को भी होल्ड पर रख दे रहे हो। मंगला तपाक से जवाब देता है – मेरे पास 10 गैस सिलेंडर है। यह ऐसा पावर है जो कई घरों का चूल्हा बुझा सकता है… जला सकता है या 25 दोनों तक का इंतजार करा सकता है।

यह सब मिडल ईस्ट डिजर्वेंस का प्रभाव है। मिडल ईस्ट का तो उसने परिभाषा ही बदल दी है। कहता है- मिडल अर्थात मध्यम एवं इष्ट अर्थात सबसे प्रिय। मतलब मध्यम वर्गीय परिवार के लिए सबसे प्रिय। यह सुन राजेश्वर लाल भी मुस्करा कर हाथ जोड़ देते हैं। कहते हैं – मुझे भी दो सिलेंडर का इंतजाम कर दो। बेटी का बर्थडे है, घर में बहुत सारे मेहनान आने वाले हैं।
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