RANCHI: बिरसा मुंडा जेल पार्क में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत आयोजित भावना योग शिविर में मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज ने साधकों को आंतरिक शुद्धि, आत्म-जागरण और करुणा-मैत्री की भावना अपनाने का संदेश दिया। शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मुनिश्री ने कहा कि भावना योग मन के विकारों को समाप्त कर व्यक्ति को उसके वास्तविक स्वरूप से जोड़ता है। उन्होंने बताया कि मैत्री, प्रमोद, करुणा और मध्यस्थ भाव अपनाने से जीवन शांत और संतुलित बनता है। उन्होंने जोर दिया कि तनाव और मानसिक समस्याओं का समाधान बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक साधना में निहित है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भावना योग से कई लोगों के स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। क्रोध और अहंकार जैसे दोषों को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने आत्म-संवाद और जागरूकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान ज्ञान कल्याणक का आयोजन भी हुआ, जिसमें भगवान के केवलज्ञान प्रकट होने की विधि मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। मुनिश्री ने इसे आत्मज्ञान के जागरण का प्रतीक बताया। इसके बाद दो नव दीक्षार्थियों की बिंदोरी अपर बाजार जैन मंदिर से बिरसा मुंडा फन पार्क तक निकाली गई, जहां गोद भराई की रस्म संपन्न हुई। उनकी दीक्षा 18 अप्रैल को पारसनाथ में होगी।
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