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Jharkhand Tourism : नई पहल : ‘बादलों के गांव वाला पहाड़’ बनेगा झारखंड का नया आकर्षण, ईको पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा सारंडा का मेघाहातूबुरू

Jharkhand Tourism : छह एकड़ में बनेगा रिजॉर्ट, टूरिज्म डेवलपमेंट की तैयारी तेज, मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, नक्सल प्रभावित क्षेत्र की बदलेगी पहचान, मिलेगा नया स्वरूप, यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को दुनिया के सामने लाएगी सरकार

by Nikhil Kumar
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Ranchi : कभी नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहने वाला पश्चिम सिंहभूम का सारंडा क्षेत्र अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं के लिए नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। सारंडा की वादियों में स्थित मेघाहातूबुरू को झारखंड सरकार बड़े ईको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है। शुक्रवार को पर्यटन, कला-संस्कृति, युवा कार्य एवं खेलकूद विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने द फोटोन न्यूज के मुख्य संवाददाता से विशेष बातचीत में बताया कि मेघाहातूबुरू में छह एकड़ भूमि चिह्नित कर ली गई है, जहां प्रकृति के अनुरूप इको रिजॉर्ट और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन ढांचा मजबूत करने और दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए पहले सेल से सहयोग मांगा गया था, लेकिन अपेक्षित सहायता नहीं मिलने के बाद राज्य सरकार ने अपने स्तर पर ही विकास कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि सारंडा जैसे प्राकृतिक और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र को राज्य के बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है।

सुदिव्य कुमार ने बताया कि झारखंड पर्यटन विकास निगम के माध्यम से यहां विकास कार्य कराया जाएगा। जल्द ही पर्यटकों को बेहतर ठहरने, घूमने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा ताकि बाहर से आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

नाम में ही छिपी है इस जगह की पहचान

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि मेघाहातूबुरू नाम ही इस स्थल की विशेषता को दर्शाता है। स्थानीय भाषा में ‘मेघ’ का अर्थ बादल, ‘हातु’ का मतलब गांव और ‘बुरू’ यानी पहाड़ होता है। अर्थात ‘बादलों के गांव वाला पहाड़’। यह इलाका वर्ष के लगभग पांच महीने बादलों से ढंका रहता है। पहाड़ियों पर तैरते बादल, घने साल वन, ठंडी हवाएं और दूर-दूर तक फैली हरियाली इसे प्राकृतिक स्वर्ग जैसा अहसास देती है। पर्यटक प्रकृति को करीब से महसूस कर सकेंगे।

बेहद करीब से देख सकेंगे खूबसूरती

सरकार की योजना यहां प्रकृति के अनुरूप पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की है, ताकि लोग सारंडा की खूबसूरती को बेहद करीब से महसूस कर सकें। यहां दर्शनीय स्थल, ठहरने की व्यवस्था, ऊंचाई से प्राकृतिक दृश्य देखने के स्थान और बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मेघाहातूबुरू झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाएगा और इससे स्थानीय लोगों को रोजगार तथा आजीविका के नए अवसर भी मिलेंगे।

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