रांची : पत्नी के कथित बांझपन की जानकारी छिपाकर शादी करने को आपराधिक कृत्य मानने से अदालत ने इनकार कर दिया है। न्यायायुक्त Anil Kumar Mishra की अदालत ने इस मामले में दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि केवल इस आधार पर किसी महिला के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें शिकायतकर्ता की शिकायतवाद संख्या XXXX/23 को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया गया था।
मामले में बिरेंद्र मोहन मिश्रा ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2022 में हुई शादी के बाद उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं। उनका कहना था कि विवाह से पहले यह तथ्य छिपाया गया, जो धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के दायरे में आता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी महिला की प्राकृतिक अथवा चिकित्सीय बांझपन को स्वतः अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि समन जारी करना गंभीर न्यायिक प्रक्रिया है और केवल प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य होने पर ही किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।
रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि मामले में ऐसा कोई ठोस आपराधिक तत्व नहीं है, जिससे आरोपित धाराएं बनती हों। इसी आधार पर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई।

