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West Singhbhum : ई-श्रम कार्ड के नाम पर अवैध वसूली की डीसी से शिकायत

West Singhbhum : उपायुक्त चंदन कुमार ने कहा कि मामले की शिकायत मिली है। इसकी जांच चल रही है।

by Rajeshwar Pandey
Illegal Collection in Name of E-Shram Card Reported in West Singhbhum
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Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले में लेबर कार्ड (ई-श्रम कार्ड) बनाकर लाभ दिलाने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत सामने आई है। पीड़िता ने बिचौलियों द्वारा अवैध राशि वसूली करने की शिकायत उपायुक्त चंदन कुमार से की है। पीड़िता सुप्रिया निषाद बड़ा नीमडीह की निवासी है।

उसने पत्र में कहा है कि 30 मार्च को मुझे लेबर कार्ड द्वारा सिलाई मशीन खरीदने के लिए 7000 रुपये प्राप्त हुए। इसके बाद बड़ा नीमडीह की शोभा देवी ने मुझे फोन करके परेशान करना शुरू कर दिया। मुझसे 1500 रुपये मांगे। जब मैंने पैसे देने से मना किया, तो उसने मुझे धमकी दी कि अधिकारियों से बोलकर मेरा लेबर कार्ड बंद करा देगी। यही नहीं, सरकारी पैसा गबन करने का आरोप लगाकर जेल भेजने की भी धमकी दी। उसने कहा कि इसका पैसा नीचे से ऊपर तक के अधिकारी लेते हैं, इसलिए 7000 में 1500 रुपये हर हाल में देना होगा। कुछ लोगों ने बताया कि कार्ड बनाते समय भी पैसा लिया गया था और अब पैसा आने पर भी कमीशन मांगा जा रहा है।

इस संबंध में उपायुक्त चंदन कुमार ने कहा कि मामले की शिकायत मिली है। इसकी जांच चल रही है। अगर कभी पैसा मांगा है और जांच में पता चलता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

डालसा की पहल से 40 साल बाद मिला बिछड़ा परिवार

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला के मुख्यालय चाईबासा स्थित सदर अस्पताल में सोमवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार मोहम्मद शाकिर व सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में अधिकार मित्रों के प्रयास से 40 वर्षों बाद अपने परिवार से बिछड़े एक पिता को उनका बेटा वापस मिल गया।

गत 2 अप्रैल को मदन साहू नामक वृद्ध को गंभीर और असहाय स्थिति में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) से जुड़ी पीएलवी प्रमिला पात्रो, रेणु देवी और सूरज कुमार ठाकुर ने न केवल उनके इलाज की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि उनके परिवार को खोजने का अभियान भी शुरू किया। वृद्ध की स्थिति इतनी दयनीय थी कि वे अपना दैनिक क्रियाकर्म भी करने में असमर्थ थे, लेकिन डालसा की टीम ने हार नहीं मानी।

पड़ताल के दौरान पता चला कि मदन साहू मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले हैं। 40 वर्ष पूर्व उन्होंने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया था और दूसरी शादी कर ली थी। काफी खोजबीन के बाद जब पहली पत्नी का बेटा कुनू साहू चाईबासा पहुंचा, तो अपने पिता को देखते ही लिपटकर रोने लगा। जिस पिता ने बचपन में साथ छोड़ दिया था, उन्हें भगवान मानकर बेटा अपने साथ घर ले गया।

इस कार्य में विनीता सांडिल, उमर सिद्दीकी, रविकांत ठाकुर और संजय निषाद का भी काफी योगदान रहा।

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