भुवनेश्वर/ जमशेदपुर : ओडिशा अब भारत का सबसे बड़ा स्टील हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक स्टील उत्पादन को मौजूदा 2.7 करोड़ टन से बढ़ाकर 10 करोड़ टन (100 मिलियन टन) करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंडियन स्टील एसोसिएशन और राज्य सरकार के बीच उच्चस्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों ने हिस्सा लिया।
जमशेदपुर बनाम कलिंगानगर : बदलती ताकत का संतुलन
एक समय था जब जमशेदपुर को भारत का स्टील कैपिटल माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। जमशेदपुर शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण विस्तार की सीमाएं हैं। वहीं, ओडिशा का कलिंगानगर विशाल लैंड बैंक और ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के कारण भविष्य के लिए ज्यादा उपयुक्त बनता जा रहा है।
कलिंगानगर में 25-30 मिलियन टन तक उत्पादन बढ़ाने की क्षमता आसानी से विकसित की जा सकती है, जबकि जमशेदपुर में यह चुनौतीपूर्ण है।
कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स में ओडिशा की बढ़त
कलिंगानगर के पास ही टाटा स्टील की प्रमुख खदानें मौजूद हैं, जिससे कच्चे माल की सप्लाई आसान और सस्ती हो जाती है। इसके अलावा, पारादीप और धामरा जैसे बड़े बंदरगाह पास होने के कारण निर्यात-आयात में भी बड़ा फायदा मिलता है।
इसके उलट, जमशेदपुर एक लैंडलॉक्ड शहर है, जहां से स्टील एक्सपोर्ट करना महंगा और समय लेने वाला साबित होता है।
इंडस्ट्री 4.0 का गेम चेंजर फैक्टर
कलिंगानगर प्लांट को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने ‘ग्लोबल लाइटहाउस’ का दर्जा दिया है, जो इसे अत्याधुनिक डिजिटल और ऑटोमेशन आधारित प्लांट बनाता है। यह तकनीकी बढ़त भविष्य में उत्पादन लागत को कम करने और दक्षता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
वहीं, जमशेदपुर का प्लांट ऐतिहासिक और स्थिर है, लेकिन तकनीकी अपग्रेडेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी है।
क्या कहती है इंडस्ट्री
टाटा स्टील से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का भविष्य कलिंगानगर में ज्यादा उज्जवल दिख रहा है। झारखंड की तुलना में ओडिशा में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक सुविधाएं विकसित हो रही हैं, जिससे निवेश और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हो रही है।
भविष्य की रेस में कौन आगे
जमशेदपुर ने भारत के औद्योगिक इतिहास को दिशा दी, लेकिन अब भविष्य की रेस में कलिंगानगर तेजी से आगे निकलता नजर आ रहा है। अगर ओडिशा अपने लक्ष्य को हासिल कर लेता है, तो आने वाले वर्षों में भारत का स्टील मैप पूरी तरह बदल सकता है और इसका केंद्र जमशेदपुर नहीं, बल्कि कलिंगानगर होगा।

