
चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को जिला स्तरीय बैठक हुई, जिसमें सरेंडर कर चुके नक्सलियों को प्रत्यार्पण एवं पुनर्वास नीति के अनुरूप देय लाभ एवं सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर मंथन किया गया। बैठक में आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए पात्र लाभुकों को सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधानों के तहत समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं से लाभान्वित करने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में परियोजना निदेशक-आईटीडीए जयदीप तिग्गा, उपसमाहर्ता सामान्य शाखा देवेंद्र कुमार, पुलिस उपाधीक्षक-मुख्यालय पूजा कुमारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी सविता टोपनो, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती, अग्रणी बैंक प्रबंधक-बैंक ऑफ इंडिया विष्णु सहित महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र एवं निदेशक, आरसेटी उपस्थित रहे।
बैठक में उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों को सरकार की प्रत्यार्पण एवं पुनर्वास नीति का वास्तविक लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्र लाभुकों के मामलों का नियमानुसार सत्यापन करते हुए आवश्यक प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें तथा पुनर्वास से जुड़ी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि पुनर्वास का उद्देश्य आत्मसमर्पित व्यक्तियों को स्थायी रूप से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना तथा उन्हें सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है।
संबंधित विभागों को दिए गए आवश्यक निर्देश
परियोजना निदेशक, आईटीडीए को निर्देश दिया गया कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पात्र लाभुकों से संबंधित मामलों में विभागीय स्तर पर संचालित योजनाओं तथा पुनर्वास नीति के तहत देय सुविधाओं का समन्वय करते हुए पात्रता के आधार पर लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। साथ ही, लाभुकों को स्वरोजगार एवं आजीविका से जोड़ने की संभावनाओं का भी आकलन करने को कहा गया।
उपसमाहर्ता, सामान्य शाखा को पुनर्वास समिति से संबंधित मामलों का समुचित अभिलेख संधारण, प्रस्तावों की समीक्षा एवं आवश्यक पत्राचार समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने सभी प्रकरणों की अद्यतन स्थिति उपलब्ध रखने तथा समिति के निर्णयों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करने को कहा।
पुलिस उपाधीक्षक, मुख्यालय को आत्मसमर्पित व्यक्तियों से संबंधित आवश्यक पुलिस सत्यापन एवं विभागीय प्रक्रियाओं को नियमानुसार पूर्ण कराने तथा पुनर्वास प्रक्रिया में आवश्यक सुरक्षा एवं प्रशासनिक समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
जिला पंचायती राज पदाधिकारी को संबंधित प्रखंड एवं पंचायत स्तर के पदाधिकारियों के माध्यम से पात्र लाभुकों की स्थानीय स्तर पर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेजों के सत्यापन में सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही, पंचायत स्तर पर उपलब्ध विभिन्न विकास एवं आजीविका योजनाओं से पात्र लाभुकों को जोड़ने की दिशा में आवश्यक समन्वय का निर्देश दिया गया।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को पात्र आत्मसमर्पित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को विभागीय स्तर पर संचालित सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं की समीक्षा करने तथा नियमानुसार पात्रता रखने वाले लाभुकों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया को आत्मसमर्पित व्यक्तियों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने, आवश्यकतानुसार बैंक खाता एवं वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया में सहयोग करने तथा पात्र लाभुकों को स्वरोजगार एवं आजीविका आधारित गतिविधियों के लिए बैंकिंग योजनाओं से जोड़ने हेतु संबंधित बैंकों के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया गया।
महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र को आत्मसमर्पित व्यक्तियों की रुचि, योग्यता एवं स्थानीय संसाधनों के अनुरूप स्वरोजगार के अवसरों की पहचान करने तथा पात्र लाभुकों को उद्योग, उद्यमिता एवं स्वरोजगार से संबंधित विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया में आर्थिक आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया जाए।
निदेशक, आरसेटी को पात्र लाभुकों की रुचि एवं क्षमता के अनुसार विभिन्न कौशल विकास एवं स्वरोजगार उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने का निर्देश दिया गया, ताकि प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार अथवा स्वरोजगार के स्थायी अवसर उपलब्ध हो सकें। साथ ही, प्रशिक्षण के बाद आजीविका से जुड़ने की संभावनाओं पर भी आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने को कहा गया।
उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक पात्र लाभुक को नीति के अनुरूप देय सुविधाओं का लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहकर लाभुकों को कौशल, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक जीवन के अवसरों से जोड़ने की दिशा में प्रभावी रूप से आगे बढ़ाई जाए।
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