
रांची : जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को अदालत से राहत नहीं मिली है। सीआईडी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा। इससे पहले कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस हुई थी। सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है।
बचाव पक्ष के वकील ने खियांग्ते को बताया बेकसूर
बचाव पक्ष के वकील ने खियांग्ते को बेकसूर बताया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। सीआईडी की छापेमारी में भी कोई आपत्तिजनक कागजात नहीं मिले हैं। वकील का कहना था कि बिना पुख्ता सबूतों के किसी को जेल में रखना सही नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
जांच एजेंसी ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति
दूसरी तरफ सीआईडी ने जमानत याचिका का सख्त विरोध किया। जांच एजेंसी ने अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपी। सीआईडी ने कहा कि इस पूरे फर्जीवाड़े में पूर्व अध्यक्ष की भूमिका बेहद गंभीर है। आरोप है कि उन्होंने एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा कराने का काम दिलवाया। इस कंपनी का नाम ट्रिपल डी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड है। एजेंसी का यह भी दावा है कि इस काम के बदले भारी कमीशन लिया गया था।
सबूत मिटाने के प्रयास का भी आरोप
सीआईडी ने अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वे काफी समय से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। तीन दिनों की लंबी पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेजा गया था।
जेपीएससी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच अभी जारी है। सीआईडी पूर्व अधिकारियों और निजी कंपनियों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक जमानत खारिज होना सीआईडी के लिए एक बड़ी सफलता है। अब एजेंसी बाकी बचे सबूतों को और मजबूत करने में जुट गई है।

