
धनबाद : कोयलांचल के सबसे चर्चित और सनसनीखेज मामलों में शामिल रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड में आखिरकार 9 साल बाद अदालत की ओर से फैसला आ गया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने मामले की लंबी सुनवाई पूरी करने के बाद दोनों मुख्य आरोपियों-नंदकुमार सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि सरकारी पक्ष आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिसके आधार पर दोनों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया गया।
बहुचर्चित हत्याकांड की अदालती कार्रवाई लगभग नौ वर्षों तक चली। आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष सरकारी वकील की ओर से अदालत के समक्ष कुल 23 गवाह पेश किए गए थे। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा की गई जिरह और प्रस्तुत किए गए तर्कों के सामने सरकारी पक्ष का दायरा कमजोर साबित हुआ।
अदालत ने सभी सबूतों, बयानों और लंबी बहसों का गहन विश्लेषण करने के बाद 19 सितंबर 2026 को अपना अंतिम निर्णय सुनाया। गौरतलब है कि इससे पहले फैसले के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी, लेकिन विशेष कानूनी बिंदुओं पर अतिरिक्त बहस के लिए समय मांगे जाने के कारण तारीख आगे बढ़ा दी गई थी।
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2017 से जुड़ी हुई हैं। 29 जनवरी 2017 की शाम लगभग 5:30 बजे धनबाद स्थित बिग बाजार के पास चाणक्य नगर मोड़ पर बेखौफ अपराधियों ने रंजय सिंह को सरेआम गोलियों से भून दिया था। रंजय सिंह धनबाद के पूर्व मेयर संजीव सिंह के बेहद करीबी माने जाते थे। बीच सड़क हुई इस खूनी वारदात के बाद पूरे कोयलांचल में हड़कंप मच गया था और राजनीतिक-सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
घटना के बाद पुलिस ने लंबी छानबीन और तफ्तीश के आधार पर नंदकुमार सिंह और हर्ष सिंह को इस हत्याकांड की साजिश और क्रियान्वयन का मुख्य अभियुक्त बनाया था। लेकिन वर्षों तक चली विस्तृत न्यायिक प्रक्रिया के बाद, अदालत में कोई ठोस और अकाट्य साक्ष्य न टिक पाने के कारण दोनों आरोपियों को कानूनी शिकंजे से राहत मिल गई है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही धनबाद के इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस का एक अहम कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है।
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