
रांची : झारखंड पुलिस के हजारीबाग एसपी कार्यालय में सामने आए 28 करोड़ रुपये के गबन मामले में एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। जिस सिपाही पर दफ्तर के हिसाब-किताब की जिम्मेदारी थी, वही इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड निकला। सीआईडी की विशेष जांच टीम ने रांची की विशेष अदालत में पुख्ता सबूत पेश करते हुए बताया है कि सिपाही शंभू कुमार सिंह ने करीब 10 सालों तक सरकारी खजाने में सेंध लगाई।
कागजों और कंप्यूटर के खेल से ठगे 28 करोड़
जांच में सामने आया कि शंभू कुमार सिंह हजारीबाग एसपी के दफ्तर की अकाउंट्स शाखा में मुख्य अकाउंटेंट के तौर पर तैनात था। उसने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए दफ्तर के गुप्त डीडीओ कोड (HZBPOL007) के जरिए गबन का ताना-बाना बुना। फर्जीवाड़े का तरीका बहुत शातिराना था। असली कागजी बिल और कंप्यूटर में दर्ज आंकड़ों में भारी फर्क रखा जाता था। कंप्यूटर डेटा में बदलाव करके सरकारी फंड को चुपचाप दूसरे खातों में भेज दिया जाता था।
साथी सिपाहियों का मिला साथ, 21 खातों में भेजी रकम
इस बड़े खेल में शंभू अकेला नहीं था। उसने अपने साथी सिपाहियों-रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज और धीरेंद्र सिंह को भी इस साजिश में शामिल कर रखा था। तीनों ने मिलकर सिस्टम में ऐसा हेरफेर किया कि सालों तक किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई।
शुरुआत में आरोपी ने बिहार के गया स्थित स्टेट बैंक की एक शाखा के दो खातों में पैसे भेजे, जिसमें से एक खाता उसका खुद का था और दूसरा संगीता चौधरी नाम की महिला का था।
अकेले इन दो खातों से ही 15.41 करोड़ रुपये निकाले गए थे। हालांकि, जब जांच का दायरा बढ़ा तो सीआईडी को पता चला कि 10 वर्षों के दौरान कुल 21 अलग-अलग बैंक खातों के जरिए पूरे 28 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई थी।
अब सीआईडी की एसआईटी ने सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रख दिए हैं, जिससे आरोपियों पर शिकंजा पूरी तरह कस गया है।
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