
चाईबासा: झारखंड के अरगोड़ा अंचल के अंतर्गत कार्यरत राजस्व उप-निरीक्षक लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या के विरोध में झारखंड राज्य राजस्व उप-निरीक्षक संघ के बैनर तले पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में गुरुवार को दूसरे दिन भी तीव्र आक्रोश प्रदर्शन देखने को मिला। संघ के निर्देशानुसार राजस्व महकमे के कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल का रास्ता अख्तियार कर लिया है। कलमबंद हड़ताल के परिणामस्वरूप संपूर्ण जिले में प्रशासनिक और अंचल से जुड़े कार्य ठप पड़ गए हैं। इस कार्य बहिष्कार के चलते आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों के निर्माण के साथ-साथ म्यूटेशन दाखिल-खारिज जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह बाधित हो चुके हैं।
अंचल कार्यालय से बिना काम कराए वापस लौटे लोग
दूर-दराज के गांवों से अपने जरूरी कार्यों के लिए अंचल कार्यालय आने वाले आम नागरिकों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। पूर्व निर्धारित रूपरेखा के अनुसार राज्य के समस्त जिलों में राजस्व उप-निरीक्षकों, अंचल निरीक्षकों (सीआई) और राजस्व अंचल अमीनों ने बाजू पर काली पट्टी बांधकर अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया। चाईबासा मुख्यालय में भी कर्मियों ने काला बिल्ला धारण कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और इस जघन्य कृत्य हत्या की पुरजोर शब्दों में भर्त्सना की। आंदोलन से जुड़े राजस्वकर्मी उमंग पांडे ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि हम सभी कर्मी पेन-डाउन स्ट्राइक पर हैं। अरगोड़ा क्षेत्र में हमारे सहयोगी राजस्व उप-निरीक्षक की निर्मम हत्या कर दी गई है, जो कि अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।
SIT का गठन, दोषियों की गिरफ्तारी व राजस्वकर्मियों को सुरक्षा देने की मांग
राजस्वकर्मियों की मुख्य मांग है कि प्रशासन दोषियों को शीघ्र अतिशीघ्र गिरफ्तार कर कठोरतम सजा सुनिश्चित करे और मैदानी स्तर फील्ड पर अपनी सेवाएं दे रहे तमाम राजस्व कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराए। संघ ने यह भी मांग उठाई है कि लक्ष्मीकांत मुंडा हत्याकांड की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए और मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। इसके अलावा पीड़ित परिवार को समुचित आर्थिक मुआवजा तथा आश्रित को सरकारी नौकरी दिए जाने की भी पुरजोर मांग की गई है।
मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की दी चेतावनी
राजस्व कर्मियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार इन मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। दूसरी ओर इस हड़ताल के कारण आम अवाम को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जरूरी दस्तावेज न बन पाने की वजह से विद्यार्थियों और कृषकों के कई अहम कार्य अधर में लटक गए हैं। प्रभावित जनता ने प्रशासन और सरकार से इस गतिरोध को शीघ्र समाप्त कर उचित समाधान निकालने की गुहार लगाई है।

