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Karwa Chauth 2026 : करवा चौथ आज, कब निकलेगा चांद, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और पूजन विधि

by Rakesh Pandey
Karwa Chauth 2026
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फीचर डेस्क : सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का त्योहार धार्मिक आस्था और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर उपवास करने के बाद शाम को करवा चौथ माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन, अर्घ्य और पूजा के साथ व्रत पूरा किया जाता है।

इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए चंद्रोदय का समय सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। दिल्ली में चांद रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर निकलने का अनुमान है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के अनुसार चांद निकलने का समय जानना जरूरी है।

तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ की पूजा के लिए चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। इस दिन महिलाएं निर्धारित पूजा अवधि में करवा माता और भगवान शिव-पार्वती की आराधना करती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।

करवा चौथ 2026 की प्रमुख तिथियां और समय इस प्रकार हैं।

करवा चौथ की तिथि : 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार

चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 29 अक्टूबर को सुबह 1 बजकर 6 मिनट

चतुर्थी तिथि समाप्त : 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 9 मिनट

पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक

व्रत की अवधि : सूर्योदय से चंद्रोदय तक

 

करवा चौथ पर आज चांद कब निकलेगा?

करवा चौथ के दिन महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन का इंतजार रहता है। परंपरा के अनुसार, चांद निकलने के बाद महिलाएं उसे अर्घ्य देती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

29 अक्टूबर को चंद्रोदय रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर होने का अनुमान है। दूसरे शहरों में चांद कुछ पहले या बाद में दिखाई दे सकता है। मौसम भी चंद्रमा के दर्शन को प्रभावित कर सकता है। आसमान में बादल छाए रहने या बारिश होने पर चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है।

ऐसी स्थिति में महिलाओं को स्थानीय धार्मिक परंपराओं और पंचांग के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। चंद्रोदय के समय को लेकर असमंजस होने पर स्थानीय मंदिर या जानकार पुरोहित से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

करवा चौथ पूजा विधि 2026 : कैसे करें करवा माता की पूजा?

करवा चौथ की पूजा परंपरागत तरीके से विधि-विधान के साथ की जाती है। महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को पूजा की तैयारी करती हैं।

करवा चौथ की पूजा विधि इस प्रकार है:

स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल तैयार करें : शाम को पूजा के लिए साफ स्थान पर चौकी रखें। उस पर करवा चौथ माता, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाएं या चित्र स्थापित करें।

पूजन सामग्री अर्पित करें : पूजा में दीपक, रोली, अक्षत, धूप, फल, मिठाई और जल से भरा करवा रखें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य सामग्री भी शामिल कर सकती हैं।

करवा चौथ माता की पूजा करें : माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करें। पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करें।

व्रत कथा सुनें : पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें। परंपरा के अनुसार, कथा सुनने के बाद आरती की जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य दें : रात में चंद्रमा निकलने पर उसके दर्शन करें और जल अर्पित करें। इस दौरान सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें।

व्रत खोलें : परंपरा के अनुसार, छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखकर पूजा की जाती है। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व

करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रमा की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। महिलाएं चंद्रमा को जल अर्पित करके पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।

चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखने और उनके हाथ से जल ग्रहण करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसी के साथ दिनभर रखा गया व्रत पूरा किया जाता है। हालांकि, पूजा की कुछ विधियों और परंपराओं में परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार अंतर हो सकता है।

करवा चौथ पर बादल छाए हों तो क्या करें?

कई बार मौसम खराब होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में व्रत खोलने के समय को लेकर सवाल उठते हैं। धार्मिक परंपराओं में ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।

यदि चंद्रोदय के समय आसमान में घने बादल हों, तो स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मार्गदर्शन लें। केवल अनुमान के आधार पर चंद्रमा के उदय का समय तय करने के बजाय विश्वसनीय स्थानीय जानकारी पर भरोसा करना बेहतर है।

करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से मधुमेह, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

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