रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी में है। पार्टी ने हाल ही में आयोजित अपने राष्ट्रीय महाअधिवेशन में झारखंड से बाहर, विशेष रूप से पड़ोसी राज्यों में संगठन के विस्तार और मजबूती से चुनाव लड़ने का संकल्प लिया था।
हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम अक्टूबर-नवंबर में संभावित बिहार चुनाव के लिए रणनीति को अंतिम रूप दे रही है। पार्टी चाहती है कि वह ‘इंडिया गठबंधन’ के बैनर तले चुनाव लड़े, लेकिन अब तक उसे आरजेडी (RJD) या अन्य घटक दलों से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
महागठबंधन से नाराज़गी, सीट बंटवारे को लेकर असमंजस
जेएमएम को यह उम्मीद थी कि जैसे झारखंड विधानसभा चुनाव में उसने आरजेडी को सीटें देकर सहयोग किया था, वैसा ही व्यवहार आरजेडी बिहार में जेएमएम के साथ करेगी। हेमंत सोरेन ने खुद तेजस्वी यादव के साथ मिलकर झारखंड में गठबंधन को मजबूती दी थी। लेकिन बिहार में महागठबंधन की हुई पिछली बैठकों में जेएमएम को न बुलाया जाना पार्टी के भीतर नाराज़गी की वजह बनता जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अगर सम्मानजनक सीटों की पेशकश नहीं की गई, तो जेएमएम बिहार में अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
किन सीटों पर है जेएमएम की नजरें
जेएमएम बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों की लगभग 12 से 15 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। इनमें प्रमुख रूप से तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, चकाई, बांका, ठाकुरगंज, रूपौली, बनमनखी, जमालपुर और धमदाहा जैसी सीटें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में झारखंड से सटे होने के कारण आदिवासी और जेएमएम समर्थक वोट बैंक का प्रभाव माना जाता है।
पिछली बार जब जेएमएम ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ा था, तो लगभग आधा दर्जन सीटों पर उसने अच्छा प्रदर्शन किया था। 2010 में चकाई सीट से सुमित सिंह जेएमएम के टिकट पर विजयी हुए थे। हालांकि, वर्तमान में वे निर्दलीय विधायक हैं और नीतीश सरकार में मंत्री भी हैं।
झारखंड में मिली सफलता का असर बिहार में दिखाना चाहती है जेएमएम
झारखंड में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद जेएमएम अब अपने राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करना चाहती है। हेमंत सोरेन के पार्टी अध्यक्ष बनने और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन को स्टार प्रचारक बनाए जाने से पार्टी को उम्मीद है कि इन दोनों नेताओं की छवि और नेतृत्व बिहार में भी लाभ देगा।
पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में बिहार, असम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठन को विस्तार देने का निर्णय लिया गया है।
क्या महागठबंधन का हिस्सा बनेगी जेएमएम
फिलहाल, इंडिया गठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, भाकपा माले और वीआईपी शामिल हैं। अब तक हुई बैठकों में जेएमएम को शामिल नहीं किया गया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या जेएमएम को गठबंधन में उचित सम्मान मिलेगा या नहीं।
यदि सम्मानजनक समझौता नहीं होता, तो जेएमएम बिहार में अकेले चुनाव लड़ सकती है। इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव झारखंड की गठबंधन सरकार पर भी पड़ सकते हैं।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ कर दिया है कि वह बिहार विधानसभा चुनाव में किसी भी स्थिति में हिस्सा लेगी। गठबंधन के तहत या अकेले—यह निर्णय आने वाले दिनों में महागठबंधन की रणनीति और रवैये पर निर्भर करेगा। यदि सहयोग नहीं मिला, तो यह गठबंधन राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

