Jamshedpur : झारखंड में माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को लगातार मिल रही सफलता के पीछे आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का हाईटेक ड्रोन ‘नेत्रा’ इस लड़ाई में गेम चेंजर साबित हो रहा है। हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से लैस यह ड्रोन जंगलों में छिपे माओवादियों की हर गतिविधि पर नजर रखता है, जिससे उनके बच निकलने की संभावना बेहद कम हो गई है।
बोकारो और हजारीबाग के घने जंगलों में बड़े इनामी माओवादियों के खिलाफ चलाए गए सफल अभियानों से लेकर पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में एक साथ 17 माओवादियों के मारे जाने जैसी बड़ी कार्रवाई में ‘नेत्रा’ ड्रोन ने अहम भूमिका निभाई है। सुरक्षा बलों के साथ कदम से कदम मिलाकर यह ड्रोन ऑपरेशन को मजबूती दे रहा है।
नेत्रा ड्रोन लगभग पांच किलोमीटर तक की दूरी में निगरानी करने में सक्षम है। यह दिनभर उड़ान भरकर इलाके की लगातार मॉनिटरिंग करता है और हल्की से हलचल को भी अपने कैमरे में कैद कर लेता है। घने जंगलों में भी यह इंसानी गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम है। हालांकि अगर कोई पूरी तरह छिप जाए तो कुछ समय के लिए बच सकता है, लेकिन लंबे समय तक छिपना संभव नहीं रह जाता।
यह ड्रोन सुरक्षा बलों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सटीक लोकेशन देता है। माओवादियों की मौजूदगी का पता चलते ही उनके लॉन्गीट्यूड और लेटीट्यूड की जानकारी मिल जाती है, जिससे सुरक्षा बल आसानी से घेराबंदी कर कार्रवाई कर पाते हैं। यही कारण है कि हाल के अभियानों में माओवादियों के बच निकलने की संभावना काफी कम हो गई है।
नेत्रा का उपयोग केवल माओवादियों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा कैंपों के बीच भी निगरानी करता है। अगर दो कैंपों के बीच दूरी अधिक हो और कोई संदिग्ध व्यक्ति गुजरता है, तो यह ड्रोन तुरंत उसकी गतिविधि रिकॉर्ड कर सुरक्षा बलों को अलर्ट कर देता है।
इसके अलावा सुरक्षा बलों के पास ‘स्विच’ नाम का एक और उन्नत ड्रोन भी है, जो बिना आवाज के कम ऊंचाई पर उड़ान भरता है। यह दुश्मन के ठिकानों की पहचान करने में बेहद कारगर साबित हो रहा है और माओवाद प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन को और प्रभावी बना रहा है। पिछले एक साल में कई बड़े ऑपरेशन में मिली सफलता इस तकनीक की उपयोगिता को साबित करती है। 21 अप्रैल 2025 को बोकारो के ललपनिया स्थित लुगू पहाड़ी में मुठभेड़ के दौरान एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक सहित आठ माओवादी मारे गए। 16 जुलाई 2025 को गोमिया के बिरहोरडेरा जंगल में पांच लाख के इनामी कुंवर मांझी को ढेर किया गया, हालांकि इस दौरान सीआरपीएफ के जवान परनेश्वर कोच शहीद हो गए।
15 सितंबर 2025 को हजारीबाग के पनतीतरी जंगल में एक करोड़ के इनामी सहदेव सोरेन समेत कई बड़े माओवादी मारे गए। 22 जनवरी 2026 को सारंडा जंगल में ऑपरेशन मेगाबुरू के तहत एक करोड़ के इनामी अनल दा सहित 17 माओवादी ढेर किए गए। वहीं 17 अप्रैल 2026 को केरेडारी क्षेत्र में चलाए गए ऑपरेशन कोतीनीर में 15 लाख के इनामी सहदेव महतो उर्फ अनुज महतो समेत चार माओवादी मारे गए। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह के अनुसार, माओवादियों के खिलाफ अभियान में ड्रोन कैमरों की भूमिका बेहद अहम है और इनकी मदद से ऑपरेशन को अधिक प्रभावी तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

