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Ranchi Murder Case: म्यूटेशन की रिपोर्ट बनी काल! रांची में अंचलकर्मी के कत्ल का सच आया सामने,तीन गिरफ्तार

बड़ा घाघरा मौजा की जमीन के म्यूटेशन में गड़बड़ी मिलने पर लक्ष्मीकांत मुंडा ने दी थी प्रतिकूल रिपोर्ट। पुलिस के मुताबिक, इसी रंजिश में जोरार स्थित आवास पर की गई थी हत्या। अन्य आरोपितों की तलाश जारी।

by Kanchan Kumar
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​रांची : ​राजधानी के नामकुम थाना इलाके में बीते दिनों हुए अरगोड़ा अंचल के राजस्वकर्मी लक्ष्मीकांत मुंडा के बहुचर्चित हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। एक तरफ जहां इस घटना ने महकमे में हड़कंप मचा दिया था, वहीं अब पुलिस की जांच में सामने आया है कि कर्तव्यनिष्ठा ही इस कर्मी की मौत का कारण बन गई। जमीन के कागजातों में हेराफेरी रोकने और नियम के खिलाफ म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) फाइलें रोकने की जिद ने उनकी जान ले ली।

​एसएसपी के निर्देश पर गठित एसआईटी ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर इस ब्लाइंड मर्डर केस में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए तीन आरोपियों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान प्रदीप गोसाई, अमित टोप्पो उर्फ अमित गोसाई और सिंधु कुमार गोसाई के तौर पर हुई है।

​क्या था पूरा मामला और क्यों रची गई साजिश

​पुलिस की तफ्तीश के मुताबिक, मामला सीधे तौर पर जमीन के बड़े विवाद से जुड़ा है। बड़ा घाघरा मौजा में करीब 96 डिसमिल जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर खींचतान चल रही थी। मृतक राजस्वकर्मी लक्ष्मीकांत मुंडा ने जब इस जमीन से जुड़े दस्तावेजों और वंशावली की गहराई से पड़ताल की, तो उसमें कई गंभीर गड़बड़ियां मिलीं।

​एक जिम्मेदार और ईमानदार कर्मचारी की तरह उन्होंने कई नामांतरण मामलों में अपनी प्रतिकूल रिपोर्ट लगा दी, जिसके आधार पर अंचल कार्यालय ने उन विवादित आवेदनों को खारिज कर दिया। कागजी खेल रुकते देख आरोपी बौखला उठे। म्यूटेशन का रास्ता बंद होता देख आरोपियों ने खौफनाक साजिश रची और 23 अक्टूबर की रात करीब साढ़े दस से ग्यारह बजे के बीच जोरार स्थित आवास पर इस वारदात को अंजाम दे डाला।

​तीन आरोपी अब भी पुलिस की रडार पर

​एसआईटी की ताबड़तोड़ छापेमारी के बीच भले ही तीन शातिर शिकंजे में आ चुके हैं, लेकिन इस पूरी साजिश में शामिल तीन अन्य चेहरे-भोला गोसाई, अमित सिंह और शैलेश अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। पुलिस इनकी तलाश में लगातार ठिकानों पर दबिश दे रही है। इसके साथ ही गिरफ्तार आरोपियों के पुराने आपराधिक इतिहास और बैकग्राउंड को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि इस वारदात में किसी पेशेवर गिरोह का हाथ था या नहीं।

​इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सरकारी कर्मियों की सुरक्षा और जमीन माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार चल रहे बाकी आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
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