Home » JSSC CGL पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन, परीक्षा एजेंसी संचालक के दो रिश्तेदार गिरफ्तार; एक सरकारी अधिकारी भी शामिल

JSSC CGL पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन, परीक्षा एजेंसी संचालक के दो रिश्तेदार गिरफ्तार; एक सरकारी अधिकारी भी शामिल

गिरफ्तार भानु प्रताप खुद भी सीजीएल परीक्षा में सफल हुआ था और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में ASO के पद पर कार्यरत था। सीआईडी के अनुसार, दोनों आरोपितों ने 10 से 12 अभ्यर्थियों को नकल कराकर पास कराने में मदद की।

by Kanchan Kumar
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​रांची : झारखंड में बहुचर्चित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली और पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस कड़ी में सीआईडी ने शुक्रवार को दो और आरोपियों को दबोचकर जेल भेज दिया है। खास बात यह है कि इस बार गिरफ्तार आरोपियों में एक ऐसा शख्स भी शामिल है जो खुद परीक्षा पास करके सरकारी विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर मजे से नौकरी कर रहा था।

​रिश्तेदारों का नेटवर्क और फर्जीवाड़े की परतें

​सीआईडी के अनुसार, जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें भानु प्रताप निवासी रविंद्र नगर, बरियातू और सुमित कुमार सिंह निवासी केशव विहार, हटिया शामिल हैं। भानु प्रताप वर्तमान में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में एएसओ के रूप में तैनात है और उसने खुद भी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास की थी। वहीं, दूसरा आरोपी सुमित कुमार सिंह रांची में अपनी किराने और फोटोकॉपी की दुकान चलाता था।

​जांच में यह बात सामने आई है कि ये दोनों आरोपी परीक्षा कराने वाली एजेंसी ‘मेसर्स आईसीएन टेक्नोलॉजी’ के संचालक मिथिलेश सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं। एजेंसी का मुख्य संचालक मिथिलेश सिंह फिलहाल फरार चल रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है। इससे पहले भी सीआईडी इसी कड़ी में मिथिलेश के एक अन्य रिश्तेदार रितेश कुमार सिंह को बोकारो के दुग्धा से गिरफ्तार कर चुकी है।

​ऐसे हुआ था सीटों का सौदा

​सीआईडी की अब तक की तहकीकात में यह पुख्ता सबूत मिले हैं कि भानु प्रताप और सुमित कुमार ने मिलकर करीब 10 से 12 अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से परीक्षा पास कराई थी। भानु ने न सिर्फ खुद यह परीक्षा क्रैक की थी, बल्कि उसने अन्य उम्मीदवारों को भी अवैध लाभ पहुंचाया था।

​यह पूरा खेल करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़ा है। परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करने, उन्हें अभ्यर्थियों को रटवाने और नकल कराने के लिए एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। इस मामले में पहले भी दो दर्जन से अधिक दलालों और एजेंटों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

​सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि जिन अयोग्य अभ्यर्थियों ने पैसे देकर नौकरियां खरीदी थीं, उनमें से कई अपनी नई सरकारी नौकरियों का सुख भोगने के बजाय जेल में दिन काट रहे हैं। सीआईडी ने इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए फरार चल रहे मुख्य संचालक मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिया है। उसके पकड़े जाने पर कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

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