
रांची:झारखंड हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी राज कुमार की बर्खास्तगी रद्द करते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने बर्खास्तगी की सजा को बदलकर दो वार्षिक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया है। बैंक को आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर बहाली और परिणामी लाभ की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
राज कुमार पर ऋण स्वीकृति में अनियमितता और बैंक नियमों के उल्लंघन समेत पांच आरोप लगे थे। अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में उनके पत्र को बिना शर्त आरोप स्वीकार करना मान लिया गया, जबकि उन्होंने आरोपों के मूल आधार और निजी लाभ लेने से इनकार किया था। बिना गवाहों के बयान और जिरह का अवसर दिए आरोप सिद्ध मानना उचित नहीं था। अदालत ने बर्खास्तगी और अपीलीय आदेश को रद्द कर दिया।
बीआईटी सिंदरी के चार असिस्टेंट प्रोफेसरों को 2019 से पदोन्नति का लाभ
झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी सिंदरी के चार असिस्टेंट प्रोफेसरों को वर्ष 2019 से करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति देने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर पदोन्नति अधिसूचित करने और पात्रता की तिथि से बकाया वेतन समेत सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ताओं में रवि शंकर प्रसाद, राजेन कुमार नायक, उज्ज्वल कुमार नायक और अभय ज्ञान पी कुजूर शामिल हैं। अदालत ने कहा कि पदोन्नति की चयन प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी हो चुकी थी, लेकिन विभाग ने इसे लंबित रखा।
सेवानिवृत्ति के बाद प्रोन्नति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व प्रभाव से प्रोन्नति देने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि समान परिस्थितियों में अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्रोन्नति का लाभ किस आधार पर दिया गया, जबकि प्रार्थी को इससे वंचित रखा गया।
प्रार्थी सुमन कुमार शाही ने याचिका दायर कर 30 अप्रैल को जारी सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी है। उनके अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने अदालत को बताया कि एक बैच के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व प्रभाव से प्रोन्नति दी गई, लेकिन प्रार्थी का अभ्यावेदन खारिज कर दिया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है।

