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Jamshedpur Women University: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय ने किया एमओयू: छात्राएं बनेंगी ड्रोन पायलट, आईटी मिनिस्ट्री से जुड़ी एजेंसी देगी ट्रेनिंग

किसी भी संकाय की छात्राएं ले सकेंगी दाखिला

by Yugal Kishor
Jamshedpur Women University Drone Training
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जमशेदपुर: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की छात्राएं अब तकनीक के क्षेत्र में नई उड़ान भरेंगी। विश्वविद्यालय ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर की डीजीसीए मान्यता प्राप्त संस्था ‘ड्रोन वैन प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। कुलपति प्रो. इला कुमार के मार्गदर्शन में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को आधुनिक ड्रोन तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। इस अवसर पर डॉ. मनीषा टाइटस, डॉ. सोनाली सिंह, पुष्पा कुमारी, डॉ. राजेंद्र जायसवाल, डॉ. सनातन दीप सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक उपस्थित रहे।

किसी भी स्ट्रीम की छात्राएं सीख सकेंगी ड्रोन तकनीक

कुलपति प्रो. इला कुमार ने बताया कि ड्रोन तकनीक आज के समय की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। इस प्रशिक्षण की सबसे खास बात यह है कि आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स—किसी भी संकाय की छात्राएं इस कोर्स में शामिल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें सीधे जॉब मार्केट के अनुकूल तकनीकी कौशल से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है।

एजेंसी दिल्ली पुलिस और सेना के साथ कर रही काम

प्रशिक्षण पार्टनर एजेंसी ‘ड्रोन वैन प्राइवेट लिमिटेड’ को भारत सरकार के नागर विमानन महानिदेशालय से मान्यता प्राप्त है। यह एजेंसी वर्तमान में दिल्ली पुलिस, भारतीय सेना और आईटी मंत्रालय के साथ मिलकर विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

कृषि से लेकर सर्विलांस तक, करियर के कई विकल्प: एक्सपर्ट

कार्यक्रम में डीजीसीए प्रमाणित इंस्ट्रक्टर कुलेश्वर ने छात्राओं को ड्रोन की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि ड्रोन मुख्य रूप से चार श्रेणियों—नैनो, स्मॉल, मीडियम और लार्ज में बंटे होते हैं। नैनो ड्रोन को छोड़कर बाकी सभी को उड़ाने के लिए वैध लाइसेंस जरूरी है।

उन्होंने बताया कि आज कृषि, आपदा प्रबंधन (बाढ़, भूकंप), मैपिंग, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सुरक्षा व वन निगरानी में ड्रोन की भारी मांग है। खेती में ड्रोन उपयोग के लिए सरकार 85% तक अनुदान दे रही है। इसके जरिए छात्राएं भविष्य में ड्रोन पायलट, एरियल डाटा एनालिस्ट, ड्रोन इंजीनियर और इंस्ट्रक्टर के रूप में आकर्षक करियर बना सकती हैं।

अगले माह होगी कार्यशाला

छात्राओं को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग देने के लिए अगले महीने विश्वविद्यालय में विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का मंच संचालन कोऑर्डिनेटर डॉ. केया बनर्जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. सलोमी कुजूर ने दिया।

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