
धनबाद : कोयला कारोबार के नाम पर करीब 300 करोड़ रुपये की बड़ी हेराफेरी करने के आरोपी भिलाई के जाने-माने शख्स और भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं। पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब नारायणी कोक प्राइवेट लिमिटेड के एमडी पवन मोर ने इस हाई-प्रोफाइल फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई। शातिर दिमाग संदीप अग्रवाल और उसके परिजनों ने पुराने कारोबारी रिश्तों की आड़ में एक ऐसा चक्रव्यूह रचा था, जिससे बचना निवेशकों के लिए मुमकिन नहीं रहा।
कोयला और कोक की समय पर आपूर्ति, आकर्षक निवेश योजनाओं के सपने और पर्सनल लोन का झांसा देकर इस गिरोह ने भोले-भाले लोगों और कंपनियों को 141 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया। जब पुलिस और जांच एजेंसियों ने फाइलों की परतें खंगालीं, तो यह घोटाला बढ़ते-बढ़ते 300 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
सरेंडर करने की फिराक में था आरोपी, पर पुलिस ने नहीं दिया मौका
कानून से बचते-बचते आखिरकार संदीप अग्रवाल की चालें धरी की धरी रह गईं। वह चुपचाप धनबाद अदालत में आत्मसमर्पण करने की फिराक में था, ताकि कानूनी प्रक्रिया से कुछ राहत पा सके। लेकिन कोलकाता पुलिस पहले से ही उसके हर कदम पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही वह डीआरएम चौक के पास पहुंचा, पुलिस ने उसे घेर कर दबोच लिया। अदालत में पेश करने के बाद उसे सीधे 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के काले चिट्ठे खंगाल रही है।
परिवार के नाम पर चल रहा था फर्जी कंपनियों का खेल
यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित खेल था। जांच में यह बात सामने आई है कि इस खेल में अकेले संदीप अग्रवाल शामिल नहीं थे, बल्कि उनकी पत्नी राखी अग्रवाल और उनके दो भाई-संजय अग्रवाल व सचिन अग्रवाल भी इस जालसाजी के मुख्य हिस्सेदार हैं।
खास बात यह है कि राखी अग्रवाल ‘विमला मेटकोक’ और ‘विमला फ्यूल्स एंड मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी कंपनियों में सक्रिय निदेशक की भूमिका निभा रही थीं। इन फर्जी और शेल कंपनियों के जाल का इस्तेमाल केवल पैसों की हेराफेरी और उन्हें ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।
कई राज्यों की पुलिस कर रही थी तलाश
गिरोह का दायरा सिर्फ एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था। झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल के कोलकाता, छत्तीसगढ़ के रायपुर और गुजरात के अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में इस गिरोह के खिलाफ कई मामले पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। अकेले धनबाद के बैंक मोड़ थाने में 5.85 करोड़ और गोविंदपुर थाने में 81.22 लाख रुपये की धोखाधड़ी की एफआईआर पहले से ही दर्ज है।
बहरहाल, संदीप अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस 300 करोड़ के काले साम्राज्य के कई और राज बाहर आएंगे और इस ठगी के खेल में शामिल बाकी चेहरों पर भी कानून का शिकंजा कस सकेगा।
Read Also: Dhanbad Murder : कतरास में घर के अंदर पुजारी की गला रेतकर हत्या, खून से लथपथ मिला शव

