
Jamshedpur : झारखंड के विद्यार्थियों को बेहतर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए अब दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार झारखंड में ही भुवनेश्वर, बेंगलुरु और विशाखापट्टनम जैसे शहरों के स्तर की शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि अभिभावकों और विद्यार्थियों का भरोसा राज्य के शिक्षण संस्थानों पर बढ़े और उन्हें अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर मिलें।
यह बातें झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने जमशेदपुर में नाम्या फाउंडेशन के एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने उच्च शिक्षा को गांवों तक पहुंचाने, पढ़ाई के साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण देने और शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।
पंचायतों में बनेंगे ज्ञान केंद्र, घर के पास मिलेगी तकनीकी शिक्षा
प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य की सभी पंचायतों को ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत पंचायत भवनों और प्रज्ञा केंद्रों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ा जाएगा। विद्यार्थी अपने नजदीकी केंद्र से राज्य के किसी भी तकनीकी कॉलेज के लर्निंग प्रोग्राम में नामांकन कर ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे।
इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को रोजाना दूर-दराज के कॉलेजों तक आने-जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजने की तैयारी है।
डिग्री के साथ एक साल की इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग अनिवार्य
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत राज्य में पढ़ाई को रोजगार और उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए अप्रेंटिसशिप युक्त डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रम (AEDP) लागू करने की दिशा में काम हो रहा है।
प्रधान सचिव के अनुसार, चार वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम में तीन साल का सैद्धांतिक अध्ययन और एक साल का औद्योगिक प्रशिक्षण शामिल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ कामकाजी अनुभव भी मिलेगा।
इसके अलावा ड्यूल एजुकेशन मॉडल के तहत विद्यार्थी अपने मुख्य पाठ्यक्रम के साथ किसी दूसरे विषय या विधा में भी कोर्स कर सकेंगे। यदि किसी वजह से पढ़ाई बीच में छूट जाती है, तो विद्यार्थी सात साल के भीतर उसे दोबारा पूरा कर सकेंगे।
राज्य में बनेगा रिसर्च और इनोवेशन का बड़ा केंद्र
झारखंड में शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए आधुनिक रिसर्च पार्क का निर्माण किया गया है। इसमें एक ही परिसर के भीतर छह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संचालित होंगे। यहां शिक्षण संस्थान, गैर सरकारी संगठन और औद्योगिक कंपनियां मिलकर शोध एवं नई तकनीकों पर काम कर सकेंगी।
इससे विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक शोध का अवसर मिलेगा और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप नए विचारों को विकसित करने में मदद मिलेगी।
676 पंचायतों में ग्रामीण जीवन पर शोध करेंगे विद्यार्थी
सरकार ‘झारखंड ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप प्रोग्राम’ भी शुरू करने जा रही है। इस वर्ष स्कूली विद्यार्थियों को राज्य की 676 पंचायतों में आठ सप्ताह तक अध्ययन और शोध का अवसर दिया जाएगा।
इस दौरान विद्यार्थी ग्रामीण जीवन, स्थानीय समस्याओं, पारंपरिक संस्कृति, हस्तकला और जड़ी-बूटियों से जुड़ी जानकारियां जुटाकर उनका दस्तावेज तैयार करेंगे। उद्देश्य है कि विद्यार्थी गांवों की वास्तविक समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए नए विचारों के साथ स्टार्टअप शुरू करने की दिशा में आगे आएं। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ उनके मेंटोर को भी स्टाइपेंड दिया जाएगा।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को योजनाओं का सहारा
प्रधान सचिव ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास कर रही है। गुरुजी क्रेडिट कार्ड, ज्ञान ज्योति और मानकी मुंडा जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।
सरकार की इन पहलों का उद्देश्य झारखंड में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ाने के साथ ग्रामीण विद्यार्थियों को भी तकनीकी ज्ञान, कौशल प्रशिक्षण, शोध और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

