
Jamshedpur : झारखंड के उच्च शिक्षा सचिव राहुल पुरवार शनिवार को जमशेदपुर में थे। वे सबसे पहले वीमेंस यूनिवर्सिटी पहुंचे और इस दौरान विवि में संचालित हो रहे अलग अलग योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही विवि के सिदगोड़ा स्थित परिसर के विस्तारिकरण पर भी मंथन किया। योजना के तहत यहां 8 नए भवन बनाए जाने हैं। इसके साथ ही जर्जर छात्रावास की मरम्मत का भी काम होना है।
नए परिसर में शिक्षकों व कर्मचारियों के आवास भी बनेगा। साथ ही एक ऑडिटोरियम भी बनेगा। उन्होंने कहा कि इसका डीपीआर जल्द फाइनल होगा। इसके बाद निर्माण की प्रक्रिया पूरी होगी। अभी इस परिसर में एक एकेडमिक भवन व छात्रावास ही है। ऐसे में इसके विस्तार की बहुत जरूरत है।
यहां स्पोर्ट कांप्लेक्स भी बनाया जाएगा। साथ ही कैंटीन व वोकेशनल भवन भी बनेगा। इस दौरान कुलपति डॉ इला कुमार भी मौजूद थीं।
कोल्हान के कॉलेजों को मिलेगा नया भवन
उच्च शिक्षा सचिव महिला विवि से को-आपरेटिव कालेज पहुंचे। यहां कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डा. अंजिला गुप्ता एवं कालेज के प्राचार्य कृष्णा प्यारे ने उनका अभिनंदन किया। इसके बाद कुलपति, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा. अमर कुमार, प्राचार्य व अन्य पदाधिकारियों के बैठक की। इस दौरान रजिस्ट्रार डा. अमर कुमार ने कालेज को विश्वविद्यालय का गौरव बताते हुए कहा कि यहां आधारभूत संरचनाओं की व्यापक कमी है। कई भवनों एवं लाइब्रेरी व जीर्ण-शीर्ण उपकरणों की खरीद की आवश्यकता है।
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति ने अन्य कालेजों की आधारभूत संरचनाओं एवं अन्य समस्याओं पर प्रकाश डाला। इसके बाद राहुल पुरवार ने कहा कि सरकार के पास राशि की कोई कमी नहीं है। सभी कालेजों की मरम्मत और नए भवनों के निर्माण का प्रस्ताव बनाकर भेजें। चरणबद्ध तरीके से आवश्यकतानुसार राशि आवंटित की जाएगी। उच्च शिक्षा सचिव ने विश्वविद्यालय को नई शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करने के लिए प्रशंसा की। यह भी कहा कि वे सत्र नियमित करने का हरसंभव प्रयास करें। इसमें सफलता भी प्राप्त हुई है। नई शिक्षा नीति के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण है। इससे पहले उच्च शिक्षा सचिव ने जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की सीनेट की बैठक में भाग लिया।
महिला विश्वविद्यालय की पहली सीनेट बैठक, जनप्रतिनिधियों को नहीं मिला आमंत्रण
जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की पहली सीनेट बैठक शनिवार को आयोजित की गई, लेकिन इसकी जानकारी सार्वजनिक तक नहीं हो सकी। बैठक को लेकर पारदर्शिता और सूचना व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, स्थानीय विधायक और सांसद सीनेट के पदेन सदस्य होते हैं, इसके बावजूद इन जनप्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रण पत्र तक नहीं भेजा गया। बताया जाता है कि इस मामले की जानकारी मिलने पर उच्च शिक्षा सचिव ने भी विश्वविद्यालय से पूछताछ की। पहली सीनेट बैठक में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

