कांग्रेस नेता राहुल गांधी फिर संसद सदस्य (Member of Parliament) बन गए। उनकी संसद सदस्यता को बहाल कर दिया गया है। लोकसभा सचिवालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मोदी सरनेम मानहानि केस में राहुल गांधी को मिली दो साल की सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के साथ उनके संसद में वापसी का रास्ता साफ हो गया था। राहुल 2019 लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से चुनाव जीते थे।

23 मार्च को अदालत ने सुनाई थी 2 साल की सजा
मोदी सरनेम मानहानि केस में राहुल गांधी को विगत 23 मार्च को निचली अदालत ने 2 साल की सजा सुनाई थी। 134 दिन बाद इस केस में सजा पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने रोक लगा दी।
राहुल ने क्या कहा था 2019 में?
राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ”नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?” इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी खिलाफ धारा 499, 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया था कि राहुल ने 2019 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?
सजा सुनाए जाने के बाद रद्द कर दी गई थी सदस्यता
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मामले में चार साल बाद 23 मार्च को सूरत की निचली अदालत ने दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट से दोषी ठहराने जाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद की सदस्यता को रद्द कर दिया था। दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून में प्रावधान है कि अगर किसी सांसद और विधायक को किसी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है। इतना ही नहीं, सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी हो जाते हैं।

