पटना। बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एस. सिद्धार्थ एक बार फिर अपने खास अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। जहां एक ओर वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी सरलता, बहुमुखी प्रतिभा और जमीनी जुड़ाव लोगों को बेहद प्रभावित करता है। इस बार वे पायलट की वर्दी में नजर आए, जिससे उनकी चर्चा और तेज हो गई है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं एस. सिद्धार्थ
डॉ. एस. सिद्धार्थ 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में बिहार सरकार में कैबिनेट विभाग और शिक्षा विभाग की अहम जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं। वे अपने प्रशासनिक कौशल के साथ-साथ एक प्रशिक्षु पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, पेंटर और कार्टूनिस्ट के रूप में भी पहचाने जाते हैं। यही बहुआयामी व्यक्तित्व उन्हें आम अधिकारियों से अलग बनाता है।
सीखते रहने वाले छात्र की तरह समर्पण और उत्साह
17 अप्रैल की सुबह, जब अधिकांश लोग दिन की शुरुआत कर रहे थे, उस समय डॉ. सिद्धार्थ ने एक और मिसाल कायम की। उन्होंने CESSNA 172 विमान में अकेले उड़ान भरते हुए अपने एरोनॉटिकल स्किल्स को निखारने का अभ्यास किया। इससे यह साफ हो गया कि वे आज भी एक सीखते रहने वाले छात्र की तरह समर्पण और उत्साह से भरे हैं। उनका यह जुनून युवाओं के लिए भी प्रेरणास्पद है।
जनता से सीधे जुड़ाव, काम करने का अलग तरीका
साधारण जीवनशैली के लिए भी डॉ. सिद्धार्थ बिहार में खासे लोकप्रिय हैं। वे कभी बाइक चलाते, कभी सड़क किनारे चाय पीते, तो कभी झोला लेकर सब्जी खरीदते नजर आ जाते हैं। सरकारी अधिकारी होते हुए भी उनमें कोई दिखावा नहीं, बल्कि एक आम आदमी जैसी सादगी देखने को मिलती है। यही वजह है कि वे जनता से सीधे जुड़ते हैं और उनके काम करने का तरीका भी लोगों को अपना महसूस होता है।
शिक्षकों-छात्रों से सीधा संवाद, नीतिगत सुधारों पर फोकस
शिक्षा व्यवस्था सुधारने की कोशिशों में डॉ. सिद्धार्थ पूरी ईमानदारी से जुटे हुए हैं। वे बिहार की स्कूलों की स्थिति को बेहतर करने के लिए लगातार फील्ड विजिट करते हैं, शिक्षकों और छात्रों से सीधा संवाद करते हैं और नीतिगत सुधारों पर फोकस रखते हैं।
डॉ. एस. सिद्धार्थ की यह खास बात है कि वे न सिर्फ उच्च पद पर आसीन हैं, बल्कि वे अपने हर पहलू को जीवंत रखते हैं– चाहे वह प्रशासन हो या रचनात्मकता, सादगी हो या सीखने की ललक।
बिहार जैसे राज्य में, जहां प्रशासनिक अधिकारियों से लोगों की उम्मीदें बहुत अधिक होती हैं, वहां डॉ. सिद्धार्थ जैसे अधिकारी का होना एक प्रेरणास्रोत है। वे यह साबित कर रहे हैं कि अगर जज्बा हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ बखूबी अपने शौक और जुनून को भी जी सकता है।

