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EXCLUSIVE : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में बीएड नामांकन में धांधली का आरोप : लाखों रुपये रिश्वत लेकर बेच दी गई कोटे की सीट

विश्वविद्यालय प्रशासन खुलेआम आरक्षण के नियमों के साथ कर रहा खिलवाड़, राजभवन से लेकर एनसीटीई तक से शिकायत की तैयारी

by Anand Mishra
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जमशेदपुर : शहर स्थित जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी कभी संविदा शिक्षकों की नियुक्ति, तो कभी एडमिशन में रोस्टर नियमों की अनदेखी को लेकर सुर्खियों में रही है। इस बार यूनिवर्सिटी में बीएड सत्र 2024-26 में ओपन काउंसलिंग के माध्यम से एडमिशन में आरक्षण नियमों की अनदेखी का मामला प्रकाश में आया है। एक-एक सीट के एवज में अच्छी-खासी रकम लेकर दाखिला लेने का आरोप लगाया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर प्रभावित छात्राएं एवं उनके अभिभावक आंदोलित हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी में जमकर हंगामा मचाया। विरोध दर्ज कराया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है। छात्र आजसू के नेता हेमंत पाठक का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन खुलेआम आरक्षण से खिलवाड़ कर रहा है। इसके खिलाफ राजभवन से लेकर एनसीटीई तक से शिकायत की जाएगी।

क्या है मामला

चार राउंड की काउंसिलिंग के बाद भी बीएड की सीट खाली रह जाने के बाद पांचवें राउंड में ओपन काउंसिलिंग हुई। इस राउंड में जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में जेनरल व अन्य कैटेगरी के अलावा ओबीसी कोटा के तहत बीसी-1 की दो और बीसी-2 की पांच सीटें खाली थीं। इसी के अनुसार जेसीईसीईबी की ओर से इन दोनों कैटेगरी की कुल सात सीटों पर एडमिशन के लिए रोस्टर यूनिवर्सिटी को उपलब्ध कराया गया था। बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसकी अनदेखी करते हुए इस कैटेगरी में छह सीट के लिए ही उम्मीदवारों की सूची जारी की। सूची में शामिल सभी छह उम्मीदवार ओबीसी कैटेगरी के हैं। सूची में बीसी-1 और बीसी-2 का उल्लेख ही नहीं है। इस तरह इन दोनों कैटेगरी को मर्ज कर दिया गया है।

बीसी-2 की पांच सीटों का क्या हुआ

इसके बाद से बीसी-2 कैटेगरी की आवेदक (छात्राएं) एवं उनके अभिभावक आंदोलित हैं। उनका कहना है कि इस कैटेगरी की पांच सीटों का क्या हुआ। यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास इसका जवाब नहीं है।

सीट बेचने का आरोप

दूसरी ओर छात्र आजसू के नेता हेमंत पाठक का आरोप है कि रोस्टर की अनदेखी के साथ ही, एडमिशन में अच्छी-खासी राशि के लेनदेन होने की आशंका है। यही वजह है कि बीसी-1 और बीसी-2 की सीटों को मर्ज कर दिया गया है।

ओपन काउंसिलिंग में उपलब्ध कराया गया था रोस्टर

पिछले ही वर्षों की तरह इस बार भी राज्य में स्थित सभी कोटि के बीएड कॉलेजों में एडमिशन के लिए झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा परिषद (जेएससीईबी)
की ओर से सेंट्रलाइज परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा के परिणाम के आधार पर काउंसिलिंग की गई। चार राउंड की काउंसिलिंग के बाद, राज्य के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में बीएड की कई सीटें खाली रह गईं। इसके बाद परिषद की ओर से यूनिवर्सिटी एवं कॉलेजों को पांचवें राउंड में ओपन काउंसिलिंग के माध्यम से एडमिशन लेने का निर्देश देते हुए सीटों की संख्या के अनुपात में नियमानुसार रोस्टर उपलब्ध कराया गया था।

यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की सलाह पर बनी सूची

ओबीसी कोटा के तहत उक्त दोनों कैटेगरी को मर्ज कर सूची तैयार किए जाने के संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। वहीं सूत्र बताते हैं कि बीएड की एडमिशन कमेटी में कुछ वैसे शिक्षक- शिक्षिकाओं को शामिल किया गया था, जो यूनिवर्सिटी के कुछ बड़े अधिकारियों की हां में हां मिलने में ही अपनी भलाई समझते हैं। इसका फायदा उठाते हुए एडमिशन कमेटी पर दबाव बनाकर सूची तैयार कराई गई है।

सवालों का जवाब नहीं दे रहा विवि

द फोटोन न्यूज के पास मेरिट लिस्ट की प्रति है। इसमें साफ पता चलता है कि बीसी-1 और बीसी-2 को अलग-अलग सीट आवंटित नहीं की गई है। इस संबंध में कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता से पक्ष लेने का प्रयास किया गया। विवि प्रशासन के खिलाफ लग रहे आरोपों पर पक्ष लेने के लिए वाट्सएप मैसेज भी भेजा गया। खबर लिखे जाने तक उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर सह प्रवक्ता डॉ. सुधीर कुमार साहू से उनके मोबाइल पर पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके अलावा उनके वाट्सएप पर भी संदेश भेजकर यूनिवर्सिटी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

नियमों की अवहेलना बनी विश्ववविद्यालय की कार्यप्रणाली

जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में नियमों की लगातार अवहेलना करना कार्यप्रणाली का हिस्सा बन गया है। संविदा शिक्षक बहाली में जनजातीय भाषा के लिए रिक्ति निकालकर बहाली में केवल संताली उम्मीदवार को बुलाया गया। नियमों के अनुसार संताली और जनजातीय भाषाओं के अंतर्गत अलग-अलग बहाली करने का प्रावधान है। इसी तरह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की तरफ से शोध पंजीकरण के लिए निर्धारित मापदंड का उल्लंघन कर असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के अधीन शोध के लिए निर्धारित सीट की संख्या में बदलाव की अधिसूचना जारी की गई।

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