चाईबासा : उत्तर प्रदेश में ज्योतिष पीठ के शांकराचार्य अविमुकतेश्वरानन्द पर लगे सभी आरोप झूठे व बेबुनियाद है। राजनीतिक षड़यंत्र के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है। उक्त बातें परमपूज्य पश्चिमाम्नाय द्वारिकाशारदापीठाधिश्वर जगतगुरु शांकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहीं। वे शनिवार को पारलीपोस स्थित विश्व कल्याण आश्रम में मीडिया को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिन्दू सनातन धर्म के आचार्य पर आक्षेप करना एक सोची समझी चाल है। लेकिन शांकराचार्य की ही जीत होगी, क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है, हार नहीं सकता है।
शांकराचार्य धर्म और सिद्धांत, सनातन की बात करते हैं और राजनीतिक पार्टी वाले उन्हें अपने ऊपर ले लेते हैं। उन्हें षड्यंत्र कर फंसा रहे हैं।ऐसा कर राजनीतिक दल अंग्रेजों की तरह सनातन धर्म को बदमान करने व तोड़ने में लगे हुए हैं। इसके लिए सभी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा की जो आज विपक्ष में है वो कभी सत्ता में है तो तब भी गौ हत्या बंद करने पर पहल नहीं की गई। वर्तमान में पक्ष वाले भी इसपर कोई पहल नहीं कर पा रहे है।
शांकराचार्य गौ हत्या वाले मुद्दे पर बात कर रहे है तो उस मुद्दे को भटकाया जा रहा है। भले ही समय लगे पर जीत होंगी। इसमें वामपंथी दल व विधर्मियो द्वारा षड्यंत्र किया जा रहा है। जो भी साधु महात्मा है वे शांराचार्य का साथ देंगे। और जो सत्ता को ही सुख मान चुके है वे इसका विरोध कर रहे है। जिनको सत्ता से सुख चाहिए, और राजनितिक नेताओं के पीछे घूम रहे है वे साधु नहीं है। हमें ईश्वर से प्रदत सुख चाहिए, राजनितिक सुख नहीं। राजनीती धर्म नियंत्रित होना चाहिए। राजा धार्मिक होना चाहिए। क्योकी जो राजा का अनुकरण प्रजा करती है।
वही शांकराचार्य अभिमुकते श्वरानंद के नियुक्ति पर कहा की श्रृंगेरी व भारती पीठ समेत सभी शांकराचार्य की मौजूदगी में उनका बतौर शांकराचार्य के चयन कर अभिषेक हुआ है। उनको दो दो शांकराचार्य का समर्थन व नियमों के तहत हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रलोभन व सुविधा देकर धर्मान्तरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार को इसपर ध्यान देकर कार्रवाई करनी चाहिए। ज्योतिषपीठ के शांकराचार्य स्वामी अभिमुकतेश्वरानंद पर लगे आरोप गलत है।
उन्होंने कहा की मूलभूत सुविधा की कमी, अज्ञानता व अपने धर्म व परंपरा का ज्ञान नहीं होने के कारण ही धर्मान्तरण होता है। कोई भले ही मान ले की धर्म बदल लिया गया है। पर क्या वास्तव में वो खूद का धर्म बदला जा सकता है। ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि उनका धर्म उनके पिता व पूर्वजों द्वारा दी गई परम्परा से प्राप्त होता है। जो धर्म है उसका त्याग कैसे किया जा सकता है। जिस प्रकार कोई अपने माता पिता को नहीं त्याग सकता है, उसी प्रकार अपने धर्म को भी त्यागा नहीं जा सकता है।

