
जमशेदपुर : सीने में अचानक दर्द, तेज धड़कन, पसीना और सांस लेने में परेशानी होते ही मन में पहला सवाल आता है—यह हार्ट अटैक है या पैनिक अटैक? दोनों स्थितियों के कई लक्षण एक जैसे दिखाई दे सकते हैं, इसलिए केवल अंदाज के आधार पर इनके बीच अंतर करना खतरनाक हो सकता है। जमशेदपुर (झारखंड) के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार, सीने में असामान्य दर्द होने पर मरीज को स्वयं बीमारी तय करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
हार्ट अटैक में शरीर देता है ये संकेत
हार्ट अटैक के दौरान सीने के बीचों-बीच दबाव, जकड़न, भारीपन या तेज दर्द महसूस हो सकता है। यह तकलीफ कुछ मिनट से अधिक समय तक रह सकती है या थोड़ी देर कम होकर दोबारा शुरू हो सकती है। कई मामलों में दर्द बाएं हाथ, दोनों बाहों, कंधे, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैल जाता है।
ठंडा पसीना, मतली, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी और सांस फूलना भी इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह के मरीजों में कभी-कभी तेज दर्द के बजाय असामान्य थकान, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
अचानक चरम पर पहुंचती है घबराहट
पैनिक अटैक में शरीर का ‘अलार्म सिस्टम’ अचानक सक्रिय हो जाता है। इससे दिल तेजी से धड़कने लगता है, सीने में चुभन या जकड़न होती है और व्यक्ति को दम घुटने अथवा नियंत्रण खोने जैसा अनुभव हो सकता है। हाथ-पैरों में झुनझुनी, कंपकंपी, अत्यधिक डर और आसपास की चीजें अवास्तविक लगना भी इसके संकेत हैं।
पैनिक अटैक आमतौर पर अचानक शुरू होता है और कुछ ही मिनटों में अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके लक्षण अक्सर कुछ समय बाद कम होने लगते हैं, लेकिन केवल इस आधार पर हार्ट अटैक की आशंका को नकारना उचित नहीं है।
सबसे बड़ा अंतर दर्द के स्वरूप में
हार्ट अटैक में दर्द प्रायः भारी दबाव या वजन जैसा महसूस होता है और शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। वहीं पैनिक अटैक में तेज घबराहट के साथ चुभन या सीमित स्थान पर दर्द अधिक महसूस हो सकता है। फिर भी दोनों की पक्की पहचान केवल लक्षणों से संभव नहीं है। ईसीजी, रक्त जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होता है।
देरी नहीं, तुरंत लें चिकित्सा सहायता
डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार, नया या असामान्य सीने का दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, बेहोशी अथवा जबड़े और हाथ तक फैलता दर्द आपात स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे में मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं या आपातकालीन सेवा से संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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