Jamshedpur (Jharkhand) : सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) ने भुवनेश्वर स्थित नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) के साथ एक समझौता (MoU) किया है, जिसके तहत रेड मड (बॉक्साइट अवशेष) से लोहा, एल्यूमिना, टाइटेनिया, स्कैंडियम ऑक्साइड तथा अन्य मूल्यवान और महत्वपूर्ण धातुओं की रिकवरी के लिए विकसित प्रक्रिया को 10 टन प्रतिदिन (10 TPD) के स्तर तक बढ़ाया जाएगा।
नीति आयोग के सहयोग से विकसित तकनीक
यह विकास स्कैंडियम की बढ़ती वैश्विक मांग और रेड मड के निस्तारण से जुड़ी पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीएसआईआर-एनएमएल में 200 किलोग्राम स्तर पर इस प्रक्रिया का प्रारंभिक विकास नीति आयोग (NITI AAYOG) के सहयोग से किया गया था, जिसमें रेड मड को स्कैंडियम के स्रोत के रूप में लक्षित किया गया था। विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष उत्पन्न होने वाले लगभग 140 मिलियन टन बॉक्साइट अवशेष में से केवल 3% (वजन के आधार पर) का ही उपयोग सीमेंट और लौह उत्पादन में किया जाता है।
एल्यूमिना और लोहे की रिकवरी संभव
भारत में प्रतिवर्ष 50 लाख टन से अधिक रेड मड उत्पन्न होता है, जिसमें 45–70 पीपीएम स्कैंडियम पाया जाता है। CSIR-NML द्वारा विकसित इस प्रक्रिया से एल्यूमिना और लोहे की रिकवरी संभव है। साथ ही दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REE) का सांद्रण प्राप्त किया जा सकता है, जिसका बाद में स्कैंडियम की रिकवरी के लिए फीड सामग्री के रूप में उपयोग किया जाएगा। स्कैंडियम एक उच्च मूल्य वाली धातु है, जिसका उपयोग एयरोस्पेस, फ्यूल सेल, लेज़र, मिग विमान, 3डी प्रिंटिंग और गार्नेट्स जैसे कई क्षेत्रों में किया जाता है। यह भारत में अपनी तरह का पहला विकास है, जो नाल्को को रेड मड की समस्या के समाधान में लंबी छलांग लगाने के साथ-साथ भारत को वैश्विक REE आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।
ये थे उपस्थित
यह समझौता विगत 6 जनवरी को नाल्को के भुवनेश्वर स्थित कार्यालय में हुआ। इस दौरान नाल्को के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक बीपी सिंह, निदेशक (तकनीकी) जगदीश अरोड़ा, आरएंडडी प्रमुख एसपी महापात्र, प्रबंधक (आरएंडडी) विनोद वर्मा उपस्थित थे। वहीं CSIR-NML की ओर से डॉ एसके पाल (बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख), डॉ. संजय कुमार, डॉ. अभिलाष, डॉ. प्रतिभा मेश्राम एवं डॉ. एनएस रंधावा उपस्थित थे।

