RANCHI: सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड के मानव विज्ञान और जनजातीय अध्ययन विभाग की ओर से 11 और 12 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें झारखंड की पारंपरिक उपचार पद्धतियों और जनजातीय समुदायों के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान पर अकादमिक चर्चा की जाएगी। संगोष्ठी का विषय झारखंड में पारंपरिक उपचार पद्धतियां रखा गया है। यह कार्यक्रम सीयूजे के अकादमिक भवन-3 स्थित मानव विज्ञान एवं जनजातीय अध्ययन विभाग में आयोजित होगा।
संगोष्ठी में देश के कई विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और अकादमिक संगठनों से जुड़े एक्सपर्ट और स्टूडेंट्स भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड और अन्य आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, औषधीय पौधों के उपयोग के अलावा लोक चिकित्सकों के अनुभव और ज्ञान को अकादमिक मंच प्रदान करना है। जिससे कि इस समृद्ध परंपरा के संरक्षण और संवर्धन पर गंभीर विमर्श किया जा सके।
मुख्य अतिथि होंगे पूर्व वीसी
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी (जेएसओयू) के पूर्व कुलपति प्रो. टीएन साहू शामिल होंगे। वहीं, सीयूजे के कुलपति उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान सीयूजे के विभिन्न विभागों के शिक्षक, रिसर्चर और स्टूडेंट्स भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। संगोष्ठी के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विशेषज्ञ अपने रिसर्च प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि झारखंड के जनजातीय समुदायों में पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक उपचार ज्ञान का डॉक्यूमेंटेशन किया जाए और इसे समाज तक पहुंचाया जा सके। इससे पारंपरिक ज्ञान की महत्ता के साथ भविष्य में इस क्षेत्र में शोध और अध्ययन के नए रास्ते भी खुलेंगे।
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