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DDU: हिंदी विभाग की 14 वर्षों से ठप्प निर्माणाधीन इमारत को पूरा करेंगे पुरातन छात्र

हिंदी विभाग के पुरातन छात्र प्रोफेसर चितरंजन मिश्रा ने सर्वप्रथम इस अधूरी इमारत की ओर सबका ध्यान आकृष्ट कराया और इसके निर्माण कार्य को पूरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

by Anurag Ranjan
DDU: हिंदी विभाग की 14 वर्षों से ठप्प निर्माणाधीन इमारत को पूरा करेंगे पुरातन छात्र
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गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पुरातन छात्र सम्मेलन 2025 का भव्य, भावनात्मक एवं सार्थक आयोजन संपन्न हुआ। 6 घंटे तक चले इस समारोह में 90 वर्ष आयु तक के पुरातन छात्र उपस्थित रहे। हिंदी विभाग के पहले बैच के विद्यार्थी मंच पर विराजमान रहे। हिंदी विभाग की कई पीढियां एक साथ भाव व स्मृतियों के सहज व निश्चल प्रवाह में कल-कल कर बहती रहीं। हिंदी विभाग की समृद्ध परंपरा एवं इतिहास की छवियों को महसूस करने का अवसर मिला।

इस दौरान पुरातन छात्रों द्वारा एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय समवेत स्वर में लिया गया। ध्यातव्य है कि हिंदी विभाग के परिसर में एक अधूरी इमारत लगभग 14 वर्षों से खड़ी है। तकनीकी कारणों से उसका निर्माण कार्य पूरा न हो सका। पुरातन छात्रों ने इस संदर्भ में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तकनीकी समस्याओं का समाधान करने की अपेक्षा व्यक्त की। जिसके उपरांत इमारत का कार्य पूरा कराया जा सके।

DDU: हिंदी विभाग की 14 वर्षों से ठप्प निर्माणाधीन इमारत को पूरा करेंगे पुरातन छात्र

हिंदी विभाग के पुरातन छात्र प्रोफेसर चितरंजन मिश्रा ने सर्वप्रथम इस अधूरी इमारत की ओर सबका ध्यान आकृष्ट कराया और इसके निर्माण कार्य को पूरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देते हुए डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अपनी हार्दिक इच्छा प्रकट करते हुए कहा कि सभी पुरातन छात्र इस इमारत के निर्माण कार्य को संपन्न कराने हेतु ₹21 का योगदान दें, शेष सभी खर्च मैं स्वयं वहन करूंगा। हिंदी विभाग के लिए कुछ योगदान कर पाना सौभाग्य की बात है।

इस समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रामदेव शुक्ल तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेंद्र बहादुर त्रिपाठी के संबोधन के साथ-साथ डॉ. प्रेमचंद सिंह, डॉ. वेद प्रकाश पांडेय, प्रोफेसर सदानंद गुप्त, प्रोफेसर रामदरश राय, डॉ. रंजना जायसवाल समेत विभिन्न पुरातन छात्रों ने अपने उदगार व्यक्त किया एवं सम्मानित हुए।

समारोह का स्वागत वक्तव्य हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर कमलेश कुमार गुप्त ने दिया। कुशल संचालन प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्र ने किया। आभार ज्ञापन प्रोफेसर अनिल राय द्वारा किया गया। साथ में मौजूदा परास्नातक बैच के विद्यार्थी एवं शोधार्थियों से लेकर प्रथम बैच के पुरातन छात्र तक मौजूद रहे।

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