RANCHI: झारखंड सरकार बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है। इसी क्रम में समाहरणालय में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बाल श्रम, बाल तस्करी, पुनर्वास, निगरानी तंत्र और कानूनी उपायों पर व्यापक चर्चा हुई। उप श्रमायुक्त अभिनाश कृष्ण ने बताया कि झारखंड ने बाल श्रमिकों की संख्या में 78% की गिरावट दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। उन्होंने यह भी कहा कि आज बाल श्रमिक पारंपरिक स्थानों से हटकर सामाजिक आयोजनों में दिखाई दे रहे हैं, जो आधुनिक जीवनशैली से प्रेरित हैं। ऐसे में सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता जरूरी है।
समाज की भागीदारी भी जरूरी
डीएसपी अमर कुमार पांडे ने कहा कि बाल श्रम समाज की गंभीर विडंबना है और इससे निपटने के लिए केवल कानून नहीं, समाज की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही बच्चों का भविष्य है और बाल श्रम को समाप्त करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। बाल कल्याण संघ के सचिव संजय मिश्रा ने बताया कि झारखंड देश का पहला राज्य है जो बाल श्रम उन्मूलन हेतु 5 वर्षीय कार्य योजना बना रहा है। उन्होंने पुनर्वास और कौशल विकास को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। वहीं सिमडेगा डीएसपी रणवीर सिंह और गुमला के श्रम अधीक्षक ने गरीबी और सामाजिक कारणों को बाल श्रम की जड़ बताया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास में परिवारों को भी शामिल करना आवश्यक है ताकि वे दोबारा बाल श्रम के चक्र में न फंसे।
बच्चों के हाथ में किताब और कलम
कार्यशाला में एफजीडी के माध्यम से सुझाव आए कि ग्राम से राज्य स्तर तक निगरानी और विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ किया जाए। कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि बच्चों के हाथ में केवल किताब और कलम हो, कोई बोझ नहीं। इस कार्यशाला का उद्देश्य 2025-2030 तक की राज्य कार्ययोजना को व्यावहारिक एवं प्रभावी बनाना था। इस कार्यशाला में 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जिनमें कई विभागों के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, विशेषज्ञ और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

