रांची : रांची को फैटी लीवर मुक्त जिला बनाने के उद्देश्य से शनिवार को केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की पहल पर फैटी लीवर मुक्त रांची अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान में दिल्ली स्थित आईएलबीएस और सदर अस्पताल रांची का सहयोग प्राप्त हुआ। लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ एसके शरीन ने बताया कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य एक साल के अंदर रांची को फैटी लीवर मुक्त करना और इसे मॉडल जिला के रूप में स्थापित करना है। इसके बाद इस मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा कि इस बीमारी से लोग जूझ रहे है। अगर सही समय पर इसका पता लगा लिया जाए तो बीमारी को ठीक किया जा सकता है। वहीं लोगों को इसकी वजह से कई अन्य बीमारियों की चपेट में आने से रोका जा सकता है।
हाईटेक सुविधाओं से लैस बस
संजय सेठ ने बताया कि वह विभाग को चार हाईटेक बसें उपलब्ध कराने जा रहे है। पहले फेज में 2 बसें दी जाएगी। वहीं दूसरे फेज में दो बसों को उपलब्ध कराया जाएगा। इन बसों में स्क्रीनिंग के लिए सारी सुविधाएं मौजूद रहेगी। फाइब्रोस्कैन के लिए भी मशीन इन बसों में रहेगी। जिससे कि तत्काल सस्पेक्टेड मरीजों की जांच की जा सकेगी। इन बसों के माध्यम से लगभग 60,000 लोगों का स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान का उद्देश्य रांची को न केवल फैटी लीवर मुक्त बनाना है, बल्कि इसे पूरे देश में एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना है।
फैटी लीवर से बीपी और डायबिटीज
लीवर स्पेशलिस्ट डॉ शिव कुमार सरीन ने बताया कि भारत में लगभग 30 करोड़ लोग फैटी लीवर से प्रभावित हैं। यह बीमारी एल्कोहलिक और नॉन-एल्कोहलिक दोनों प्रकार की होती है। फैटी लीवर से शरीर को अधिक इंसुलिन की आवश्यकता होती है, जिससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। फैटी लीवर की रोकथाम के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जंक फूड से बचना, मोटे अनाज, फल, सब्जियां और दालों का सेवन बढ़ाना होगा। इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना इन बीमारियों से बचने के उपाय हैं। आईएलबीएस के डायरेक्टर डॉ बीबी रेवाड़ी ने सुझाव दिया कि दूध वाली चाय के बजाय दिन में दो बार ब्लैक कॉफी का सेवन करने से फैटी लीवर की समस्या को रोका जा सकता है।
आईएलबीएस की डॉ कनिका कौशल ने कहा कि फैटी लीवर की स्क्रीनिंग जल्दी हो जाए तो स्पेशलिस्ट के पास रेफर किया जा सकते है। हर तीसरा आदमी आज नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर की चपेट में है। सहिया दीदी और आशा दीदी प्राइमरी लेवल पर लोगों की स्क्रीनिंग करेगी। इसके बाद उन्हें अपर लेवल पर रेफर किया जाएगा। वहीं ब्लड टेस्ट करने के बाद फाइब्रोस्कैन किया जाएगा। जिससे मरीजों के फैटी लीवर के लेवल का पता लगाया जाएगा। लीवर में 5 परसेंट फैट होता है। लेकिन 10 परसेंट से अधिक हो तो ऐसे में अलर्ट होने की जरूरत है। वहीं तत्काल ट्रीटमेंट करना भी है। इससे कई अन्य बीमारियों की चपेट में आने से बचा जा सकता है।
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