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Jonha Falls : प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम है जोन्हा जलप्रपात, दूध जैसी सफेद धारा देख मोहित हो जाते हैं पर्यटक, जानें घूमने का सही समय

Jonha Falls : जोन्हा जलप्रपात सिर्फ प्राकृतिक प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांच पसंद करने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ी रास्ते, जंगलों के बीच ट्रैकिंग और जलप्रपात तक उतरने का अनुभव पर्यटकों को रोमांच से भर देता है।

by Anurag Ranjan
Jonha Falls waterfall surrounded by lush greenery in Ranchi Jharkhand
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फीचर डेस्क : जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास हुआ, इंसान ने अपने सुख सुविधा के साधनों के साथ-साथ मनोरंजन के साथ-साथ सुकून भरे पलों के लिए कई रास्ते अपनाए। इनमें पर्यटन एक बेहद सशक्त माध्यम बना। इसमें भी जल स्रोतों ने न केवल प्रमुखता से सबका ध्यान आकृषित किया, अपितु सबके कौतूहल का विषय बना। हमारे देश भारत में कई प्रकार के जल स्रोत हैं, जिनमें हजारों की संख्या में जलप्रपात हैं। बात झारखंड राज्य की करें तो यहां भी तकरीबन 200 छोटे-बड़े जलप्रपात हैं। इन्हीं जलप्रपातों में सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला जोन्हा जलप्रपात के बारे में हम यहां विस्तार से चर्चा करेंगे।

जोन्हा जलप्रपात की अदभुत छटा

राजधानी रांची से 40 किलोमीटर दूर है जोन्हा जलप्रपात

झारखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ियों और जलप्रपातों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों में से एक जोन्हा जलप्रपात झारखंड की राजधानी रांची से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर रांची-पुरुलिया राजमार्ग पर स्थित है। इसके सबके निकट स्थित जोन्हा गांव की वजह से ही यह जोन्हा जलप्रपात के नाम से जाना जाने लगा। तकरीबन 43 मीटर (141 फीट) की ऊंचाई से गिरता हुआ पानी इसे बेहद आकर्षक एवं खूबसूरत बनाता है। इसे सर्वाधिक सुरक्षित जलप्रपातों में से एक माना जाता है।

गौतमधारा के नाम से भी मिली है पहचान

जोन्हा जलप्रपात को गौतमधारा भी कहा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, भगवान बुद्ध ने इस क्षेत्र में कुछ समय तक ध्यान किया था। इसी कारण यहां एक छोटा बौद्ध मंदिर भी स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के कारण यह स्थान आध्यात्मिक महत्व भी रखता है। यह हर साल हजारों की संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। पहाड़ों से गिरती दूध जैसी सफेद जलधारा, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण यहां आने वाले हर व्यक्ति को प्रकृति के करीब ले जाता है।

प्राकृतिक सुंदरता का बनता है अद्भुत दृश्य

43 मीटर की ऊंचाई से गिरता पानी जब चट्टानों से टकराता है, तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। बरसात के मौसम में इसका स्वरूप और भी आकर्षक हो जाता है। तेज बहाव के साथ गिरता पानी किसी सफेद चादर जैसा दिखाई देता है।

Jonha Falls Stairs
जोन्हा फॉल्स तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को लगभग 700 से अधिक सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं।

700 से अधिक सीढ़ियां उतरने पर दिखता है मनोरम दृश्य

जोन्हा फॉल्स तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को लगभग 700 से अधिक सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। यह रास्ता थोड़ा थकाने वाला जरूर है, लेकिन नीचे पहुंचने के बाद दिखाई देने वाला दृश्य सारी थकान दूर कर देता है। कई लोग यहां घंटों बैठकर पानी की आवाज सुनते हैं और प्रकृति का आनंद लेते हैं।

मकर संक्रांति पर लगता है मेला

हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर यहां मेला आयोजित होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। मेले में झारखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और स्थानीय खानपान की झलक देखने को मिलती है। ग्रामीण परिवेश और आदिवासी संस्कृति यहां आने वाले लोगों को खास अनुभव देती है।

रोमांच से भरपूर है जोन्हा फॉल्स

जोन्हा जलप्रपात सिर्फ प्राकृतिक प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांच पसंद करने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ी रास्ते, जंगलों के बीच ट्रैकिंग और जलप्रपात तक उतरने का अनुभव पर्यटकों को रोमांच से भर देता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह बेहद खास है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है। सोशल मीडिया के दौर में लोग यहां की तस्वीरें और वीडियो साझा करना पसंद करते हैं।

पर्यटकों की पहली पसंद है जोन्हा फाॅल्स

पर्यटन से स्थानीय लोगों को लाभ

जोन्हा जलप्रपात झारखंड के पर्यटन उद्योग में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां आने वाले पर्यटकों के कारण स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। आसपास के ग्रामीण चाय-नाश्ता, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। कई स्थानीय युवक पर्यटकों के लिए गाइड का काम भी करते हैं।

सिटी ऑफ फॉल्स के नाम से विख्यात रांची का प्रमुख पर्यटन केंद्र है जोन्हा फॉल्स

रांची आने वाले अधिकतर पर्यटक दशम फॉल, हुंडरू फॉल और जोन्हा फॉल को एक साथ देखने की योजना बनाते हैं। इस वजह से यह क्षेत्र झारखंड पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

घूमने का यह है सही समय

किसी भी जलप्रपात का सौंदर्य बारिश के मौसम में सबसे अधिक निखर कर सामने आता है। ऐसे मौसम में पानी का बहाव काफी तेज रहता है, जो इसे और भी बेहद आकर्षक रूप प्रदान करता है। इसलिए जोन्हा जलप्रपात घूमने का सबसे सही समय जुलाई से फरवरी के बीच का होता है।

FAQ (Frequently Asked Questions)

Q1. जोन्हा जलप्रपात कहां स्थित है?

जोन्हा जलप्रपात झारखंड की राजधानी रांची से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर रांची-पुरुलिया राजमार्ग पर स्थित है।

Q2. इसका नाम जोन्हा जलप्रपात कैसे पड़ा?

जोन्हा गांव के सबसे पास में होने की वजह से ही यह जोन्हा जलप्रपात के नाम से जाना जाने लगा। जोन्हा गांव ही वह आखिरी पड़ाव है जहां तक गाड़ी से जाया जा सकता है।

Q3. जोन्हा जलप्रपात घूमने का सबसे सही क्या है?

जोन्हा जलप्रपात घूमने का सबसे सही समय जुलाई से फरवरी के बीच का होता है। ऐसे मौसम में पानी का बहाव काफी तेज रहता है, जो इसे और भी बेहद आकर्षक रूप प्रदान करता है।

Q4. क्या इसे किसी और नाम से भी जाना जाता है?

हां, इसे गौतमधारा के नाम से भी जाना जाता है।

Q5. क्या जोन्हा जलप्रपात से कोई धार्मिक महत्व भी जुड़ा है?

हां, भगवान बुद्ध ने इस क्षेत्र में कुछ समय तक ध्यान किया था। इसी कारण यहां एक छोटा बौद्ध मंदिर भी स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के कारण यह स्थान आध्यात्मिक महत्व भी रखता है।

Q6. जोन्हा जलप्रपात की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

जोन्हा जलप्रपात की मुख्य विशेषताओं में पहाड़ों से गिरती दूध जैसी सफेद जलधारा, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण है। यह विशेषता यहां आने वाले हर व्यक्ति को प्रकृति के करीब ले जाता है।

Q7. जोन्हा फॉल्स में कितनी ऊंचाई से पानी गिरता है?

जोन्हा फॉल्स में तकरीबन 43 मीटर (141 फीट) की ऊंचाई से गिरता हुआ पानी इसे बेहद आकर्षक एवं खूबसूरत बनाता है।

Q8. जोन्हा जलप्रपात किस अवसर पर लगने वाले मेले को लेकर भी प्रसिद्ध है?

जोन्हा जलप्रपात हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले मेले को लेकर भी प्रसिद्ध है?। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। मेले में झारखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और स्थानीय खानपान की झलक देखने को मिलती है।

Q9. जोन्हा फॉल्स तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कितनी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं?

जोन्हा फॉल तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को लगभग 700 से अधिक सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। जो पर्यटकाें काे रोमांच से भर देता है।

Q10. किस कारण जोन्हा जलप्रपात का पानी सफेद चादर समान प्रतीत होता है?

बरसात के मौसम में जोन्हा जलप्रपात और भी आकर्षक हो जाता है। तेज बहाव के साथ गिरता पानी किसी सफेद चादर जैसा दिखाई देता है।

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