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ये घरेलू उपाय करें, डिप्रेशन कभी नहीं होगा हावी, जानिए कैसे?

by Shyam Kishor Choubey
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नई दिल्ली : हम सभी अपने शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति तो सचेत रहते हैं, लेकिन भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के बोझ अथवा तनाव के बीच हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज करते हैं। हमारे मानसिक स्वास्थ्य का हमारे शारीरिक स्वास्थ्य से बहुत गहरा संबंध होता है। आजकल डिप्रेशन एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। डिप्रेशन का शिकार बच्चों और युवाओं से लेकर वृद्ध तक हो रहे हैं। डिप्रेशन मुख्यतः तनाव या ओवरथिंकिंग की वजह से होता है। आईए जानते हैं, कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में जिससे आप डिप्रेशन को कम कर सकते हैं।

आहार का है मन से गहरा संबंध

यह एक प्रचलित कहावत है कि ‘जैसा अन्न वैसा मन।’ आहार का हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। डिप्रेशन को कम करने के लिए पोषणयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए। डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों और मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए। चुकंदर, टमाटर, खीरा, सलाद के रूप में खाना चाहिए। जंक- फूड से परहेज करना चाहिए। फास्ट- फूड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। साथ ही चाय कॉफी के सेवन से भी परहेज करना चाहिए। धूम्रपान और शराब से दूर रहना चाहिए।

जीवन शैली की है अहम भूमिका

डिप्रेशन से गुजर रहे, व्यक्ति को एक स्वस्थ जीवनशैली की सबसे अधिक जरूरत होती है। एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना, डिप्रेशन को कम करने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए। अपने मन के विचारों को किसी भी व्यक्ति के साथ साझा करना चाहिए। इससे आपके मन का बोझ हल्का होगा। हमेशा सकारात्मक बातों पर ध्यान केंद्रित करें। मोटिवेशनल या कोई भी मधुर संगीत सुन सकते हैं। सेल्फ हेल्प बुक्स या कहानी उपन्यास की किताबें पढ़नी चाहिए। अपनी दिनचर्या में योग- व्यायाम, ध्यान को नियमित तौर पर शामिल करना चाहिए।

डिप्रेशन के सामान्य लक्षण

डिप्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिससे पता चलता है कि कोई व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है या नहीं। इन लक्षणों में एकाग्रता में कमी, लंबे समय तक दुखी या चिंतित रहना, समाज से कट कर रहना, एकांतप्रिय रहना, भूख का बहुत अधिक लगना या बिल्कुल ना लगना, आत्मविश्वास में कमी, चिड़चिड़ा रहना, निर्णय न ले पाना, आदि है।

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