
चाईबासा : महिला कॉलेज चाईबासा के इतिहास विभाग द्वारा गांधी जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्व संध्या पर एक गरिमामय विशेष कार्यक्रम आयोजित की गई। यह आयोजन कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अंजना प्रेमा वंदना खलखो के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
संस्थान के स्थापना दिवस का गौरवशाली इतिहास
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कॉलेज के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 2 अक्टूबर 1969 को राष्ट्रपिता की 100वीं जयंती के अवसर पर ही इस महिला कॉलेज की नींव रखी गई थी। इस दौरान गांधीवादी विचारों, स्त्री शिक्षा के आदर्शों और संस्थान की 50 से अधिक वर्षों की समृद्ध विरासत को रेखांकित किया गया।
गांधी और शास्त्री के विचारों पर हुआ विशेष व्याख्यान
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता जायसवाल ने अपने संबोधन में दोनों महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने गांधीजी की ‘मोहनदास से महात्मा’ बनने तक की यात्रा, स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और ‘हिंद स्वराज’ में वर्णित स्वदेशी, आत्मनिर्भरता व पर्यावरण संरक्षण की वर्तमान प्रासंगिकता पर बात रखी। डॉ. जायसवाल ने वर्ष 1925 में गांधीजी के चाईबासा आगमन और उनके चरखा व खादी के संदेश का भी विशेष उल्लेख किया। वहीं, लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, निष्ठा और ईमानदारी को विद्यार्थियों के लिए अनुकरणीय बताया।
वैश्विक मंच पर गांधीवादी विचारधारा की छाप
कार्यक्रम में डॉ. ललिता सुंडी ने गांधी जी के विचारों के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव की चर्चा की। उन्होंने नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे वैश्विक नेताओं का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह गांधीवादी सत्याग्रह और अहिंसा ने पूरी दुनिया को दिशा दिखाई।

कार्यक्रम में शामिल कॉलेज की छात्राएं
भाषण व प्रश्नोत्तरी में छात्राओं ने दिखाया उत्साह
इस अवसर पर छात्राओं के लिए भाषण एवं प्रश्नोत्तरी (क्विज़) प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें कॉलेज की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के सफल समापन पर डॉ. अंजना सिंह ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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