रोहित कुमार
जमशेदपुर : झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। दावा किया गया है कि पूर्वी सिंहभूम के सोनारी स्थित सिदो-कान्हू बस्ती-02 सोनारी केंद्र में नशा संबंधी सामग्री हड़िया दारू रखा जाता है। जमशेदपुर सदर की पूर्व बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की ओर से महिला पर्यवेक्षिका वीणा कुमारी के नाम जारी किए गए स्पष्टीकरण में इस बात का उल्लेख किया गया है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि महिला पर्यवेक्षिका की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण नहीं किया जाता। इस मामले में जवाब तलब करते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।

कमीशनखोरी के आरोप पर बोलीं दुर्गेश नंदिनी, जांच में फंस रही सेविकाओं ने लगाए झूठे आरोप
वर्तमान में सरायकेला-खरसावां में पदस्थापित जमशेदपुर सदर की पूर्व बाल विकास परियोजना पदाधिकारी दुर्गेश नंदिनी ने सोमवार को ‘द फोटोन न्यूज’ की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब में अपनी स्थिति स्पष्ट की। दावा किया कि उनके खिलाफ सेविकाओं की ओर से लगाए जा रहे कमीशन वसूलवाने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने 16 सितंबर 2024 को जमशेदपुर के सोनारी स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया था। इसमें तीन आंगनबाड़ी केंद्रों में गड़बड़ी मिली थी। इस कारण उन्होंने तीनों आंगनबाड़ी सेविकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया। लिहाजा जांच में फंसने के डर से संबंधित सेविकाओं की ओर से उन पर झूठे आरोप लगाए गए।
दस सेविकाओं की ओर से उपायुक्त को लिखा गया पत्र
आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही कमीशनखोरी को लेकर एक तरफ जहां लगातार ऑडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ सेविकाओं की ओर से उप विकास आयुक्त को लिखित शिकायत की गई है। इस बीच एक और पत्र सामने आया है। इस पत्र पर 10 आंगनबाड़ी सेविकाओं के हस्ताक्षर हैं। संबंधित पत्र पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को लिखा गया है। इसमें दावा किया गया है कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी तथा महिला पर्यवेक्षिका की ओर से किसी तरह की वसूली नहीं की जाती है।
दस सेविकाओं की ओर से उपायुक्त को लिखा गया पत्र
आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही कमीशनखोरी को लेकर एक तरफ जहां लगातार ऑडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ सेविकाओं की ओर से उप विकास आयुक्त को लिखित शिकायत की गई है। इस बीच एक और पत्र सामने आया है। इस पत्र पर 10 आंगनबाड़ी सेविकाओं के हस्ताक्षर हैं। संबंधित पत्र पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को लिखा गया है। इसमें दावा किया गया है कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी तथा महिला पर्यवेक्षिका की ओर से किसी तरह की वसूली नहीं की जाती है।
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