RANCHI : मैं हरमू नदी हूं। कभी शहर की लाइफलाइन हुआ करती थी। लेकिन, आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही हूं। मुझमें कचरे का अंबार जमा है। लेकिन, मेरी ओर किसी का ध्यान नहीं है। मैं बजबजा रही हूं। आखिर मेरा कसूर क्या है, जो मुझसे सबने नजरें फेर ली हैं। ये सवाल स्थापना दिवस पर हरमू नदी सरकार से पूछ रही है। चूंकि पूरा शहर झारखंड के 25वें स्थापना दिवस पर जगमगा रहा है। दीवारों को पेंटिंग कर सजाया जा रहा है। चौक-चौराहे रोशनी में नहा रहे है। कार्यक्रम स्थल को दुल्हन की तरह सजाया गया है। लेकिन हरमू नदी अपनी दुर्दशा पर रो रही है।
राजधानी रांची के इतिहास की गवाह हरमू नदी अब मर चुकी है। राज्य सरकार के तमाम दावों और प्रयासों के बावजूद इस नदीं में केवल नाले का पानी है। बरसात में तो साफ पानी बहता है। लेकिन बारिश खत्म होते ही नाले के रूप में दिखाई दे रही है। जबकि इस नदी के जिर्णोधार के लिए सरकार ने 84 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं दोनों ओर पौधारोपण भी किए गए थे। इतना खर्च करने के बाद भी हरमू की दुर्दशा हो गई है। लोगों के घरों के नाले का पानी भी इस नदी में जा रहा है।
एसटीपी भी नहीं आया काम
हरमू नदी में कई जगहों पर मिनी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए थे। जिससे नाले को पानी को साफ कर नदी में बहाया जाना था। लेकिन ये ट्रीटमेंट प्लांट भी नाकाफी साबित हो रहे है। आज नदी में नाले का पानी जा रहा है, जो लोगों घरों के सीवर से निकलकर नदी में मिल रहा है। 2018 में करीब चार हजार पौधे भी नदी किनारे लगाए गए थे। उसमें भी ज्यादातर पौधे मर गए है।
नहीं हटाया गया किनारे से अतिक्रमण
जमीन का कारोबार करने वालों ने हरमू नदी के किनारों पर अतिक्रमण कर जमीन बेच दी। नदी किनारे बने खटाल और घरों से निकलनेवाला गंदा पानी हरमू में ही गिर रहा है। बढ़ती आबादी का बोझ भी नदी पर बढ़ता जा रहा है। इससे यह नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। हरमू नदी के सौंदर्यीकरण की देखरेख के लिए नगर विकास विभाग ने एक कमेटी बनाई थी। उसी कमेटी ने जांच के बाद योजना के डीपीआर को ही त्रुटिपूर्ण करार दिया था। इसके बाद भी उस डीपीआर के आधार पर किए गए निर्माण कार्यों पर 84 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए।
शहर की सफाई में दिन-रात जुटा निगम
राजधानी को चकाचक करने में रांची नगर निगम पूरे जोर-शोर से लगा है। अलग-अलग टीमें बनाकर तीन शिफ्टों में सफाई का काम जारी है। हाईटेक मशीन से स्वीपिंग कराई जा रही है। गंदगी वाली जगहों पर ब्लीचिंग छिड़काव कराया जा रहा है। अधिकारियों से लेकर सुपरवाइजरों को निर्देश दिया गया है कि कहीं भी गंदगी नहीं दिखनी चाहिए। लेकिन हरमू नदी को लेकर निगम ने गंभीरता नहीं दिखाई।

