हेल्थ डेस्क, जमशेदपुर : 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इस बार का थीम ‘दिल को किस तरह से सेहतमंद या हेल्दी रखें और दिल को जानें’ है। आज के समय में कम उम्र में हृदय रोगियों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है लेकिन राहत की बात यह है कि अगर समुचित प्रयास हो तो 99 प्रतिशत मरीजों की जान बचाई जा सकती है। जी हां। आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे संभव हो सकता है। तो आइए, इसके बारे में हम ब्रह्मानंद नरायणा अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता से जानते हैं।
गोल्डन आवर को पहचानें
डॉ. संतोष गुप्ता कहते हैं कि हृदय रोगियों की जान बचाने के लिए सबसे पहले हमें जागरूक होने की जरूरत है। हार्ट अटैक आने के बाद उसके अगले तीन घंटे काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसे मेडिकल भाषा में गोल्डन आवर कहा जाता है। अभी तक देखा गया है कि हार्ट अटैक आने के बाद अगर रोगी तीन घंटे के अंदर अस्पताल पहुंच जाता है तो 99 प्रतिशत मामलों में जान बचने की संभावना होती है। हार्ट अटैक के रोगी जितने देर से अस्पताल पहुंचने हैं, उनके लिए उतना ही अधिक खतरा रहता है। बहुत कम ही मरीज समय पर अस्पताल पहुंच पाते हैं। कई मरीज तो हार्ट अटैक आने के 12 से 15 दिन के बाद अस्पताल आते हैं। ऐसे में उनकी जान बचाने की संभावना कम हो जाती है।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा हृदय रोग
डॉ. संतोष गुप्ता कहते हैं कि जिस तरह से हमलोगों की दिनचर्या हो गई है, उसमें अगर सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में न सिर्फ हार्ट अटैक बल्कि सभी तरह के हृदय रोगियों की संख्या बढ़ना तय है। चूंकि, हृदय रोग बढ़ने का मुख्य कारण कम उम्र में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, कम नींद, शराब का सेवन, तनाव, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा है। इस तरह की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इसमें अगर सुधार नहीं किया गया तो फिर बीमारी बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।
जिम जाने से पहले कराएं जांच
डॉ. संतोष गुप्ता कहते हैं कि हाल के दिनों में जिम जाने वाले कई लोगों में हार्ट अटैक के मामले देखने को मिले हैं। ऐसे में इसके प्रति लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। बेहतर होगा कि अगर आप जिम जाना चाहते हैं तो एक बार डॉक्टर के परामर्श पर जांच करा लें। इससे अगर आपको किसी तरह की परेशानी होगी तो वह सामने आ जाएगी। कई बार लोगों को हार्ट रोग की शिकायत होती है लेकिन जांच समय पर नहीं होने के कारण बीमारी पकड़ में नहीं आती और जब ब्लॉकेज लगभग 70 प्रतिशत हो जाता है तो अचानक से हार्ट अटैक आता है। इस दौरान तत्काल बेहतर चिकित्सा की जरूरत होती है। इसमें देरी से मरीज की मौत तक हो जाती है। वहीं, रोगी का समय पर इलाज शुरू हो जाए तो उसकी जान बच जाती है। कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वह हृदय रोग से पीड़ित हैं। ऐसे में बगैर सही सलाह के जिम ज्वाइन करना कई बार खतरनाक साबित होता है।
इस तरह से कराएं जांच
जिम जाने से पूर्व एक बार इसीजी सहित अन्य जांच करा लेना चाहिए। वहीं, जिम जाते ही तत्काल सभी तरह के व्यायाम नहीं करने चाहिएं। अधिकता किसी के लिए नुकसानदेह होती है। अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं ज्यादा या अत्यधिक व्यायाम करने से हृदय की मांसपेशियों पर कालांतर में प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हृदय रोगों का पता लगाने के लिए इसीजी, चेस्ट एक्सरे, इकोकार्डियोग्राफी, टीएमटी, हॉल्टर सहित अन्य जांच के बाद ही आप जिम में सभी तरह के व्यायाम कर सकते हैं।
हार्ट अटैक के लक्षण
– घबराहट होना।
– छाती में दर्द होना।
– सांस फूलना।
– धड़कन का बढ़ जाना।
– अचानक से बेहोश हो जाना।
– घबराहट के साथ पसीना आना।
– ये सारे लक्षण महसूस हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से संपर्क करें।
हृदय रोग से कैसे बचें
– नियमित रूप से व्यायाम करें।
– बाहर के खान-पान से बचें।
– तनाव नहीं लें।
– शराब का सेवन नहीं करें।
– मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।
– अपने आहार में फल, सलाद, हरी सब्जियां, साबुत अनाज शामिल करें।
– भोजन में तेल और घी की खपत कम करें।
– उम्र 35 के बाद किसी भी तरह
के लक्षण महसूस हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करें।

