Jamshedpur : शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती, यह बात जिले के उन महिलाओं और पुरुषों ने साबित कर दी है, जो 50 से 60 वर्ष की उम्र तक अनपढ़ थे, लेकिन अब साक्षर बन चुके हैं। इनमें कई ऐसे लोग भी हैं जिनके बेटे-बेटियों की शादी हो चुकी है और घर में पोते-पोतियों की रौनक है। पहले ये लोग बाजार में दुकानों के नाम तक नहीं पढ़ पाते थे और सामान की कीमत जानने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते थे। सरकारी दफ्तरों में हस्ताक्षर की जगह अंगूठा लगाना पड़ता था।
रविवार को शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित उल्लास नव भारत साक्षर कार्यक्रम की परीक्षा में कई नव साक्षर शामिल हुए। इनमें 57 वर्षीय भरत सरदार भी थे। उन्होंने बताया कि पहले वे हिसाब-किताब नहीं कर पाते थे, लेकिन दो महीने के प्रशिक्षण के बाद अब अंगूठे की जगह हस्ताक्षर करते हैं और दुकानदार से खुद हिसाब कर लेते हैं।
इसी तरह 68 वर्षीय दशरथ माझी ने भी साक्षर बनने की परीक्षा दी। तबीयत खराब होने के बावजूद वे इस मिशन से जुड़े। उन्होंने बताया कि अब वे अपना हस्ताक्षर करने के साथ-साथ परिवार के सभी सदस्यों का नाम पढ़ और लिख सकते हैं। इस परीक्षा को लेकर बजुर्गों में अधिक उत्साह देखने को मिला। अलग अलग केंद्रों पर किसी बुजुर्ग को उनके पोते लाते दिखे तो किसी के पति, वहीं कुछ ऐसे भी थे जो आने में सक्षम नहीं थे तो उन्हें शिक्षकों ने अपनी गाड़ी से परीक्षा केंद्र पहुंचाया। कई तो व्हीलचेयर पर बैठकर परीक्षा केंद्र पहुंचे और परीक्षा देखकर साक्षर बनने की दौड़ में शामिल हुए। पूर्वी सिंहभूम जिले के हर एक कोने पर हमारे जन शिक्षण की पहल पर लगभग 13409 लोग जो शामिल हुए जो यह दर्शाता है कि हम बहुत जल्द पूर्वी सिंहभूम जिले को पूर्णरूपेण साक्षर जिला घोषित कर सकते हैं।
जिले के 200 केंद्रों पर आयोजित हुई परीक्षा
रविवार को जिले के सभी प्रखंडों में 362 केंद्रों पर बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक जांच परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें 26000 लोगों को शामिल होना था। इसमें से 13343 लोग शामिल हुए। इस परीक्षा में कुल परीक्षार्थियों में से 40 प्रतिशत परीक्षार्थी ऐसे थे जो 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे और अपने जीवन में पहली बार किसी परीक्षा में शामिल हुए।
अगले साल झारखंड शत प्रतिशत साक्षर राज्यों की श्रेणी में होगा शामिल : डॉ. कुलदीप कुमार
इस परीक्षा की मॉनिटिरंग के लिए शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के प्रौढ़ शिक्षा सलाहकार डॉ. कुलदीप कुमार पहुंचे थे। उन्होंने दिन में अलग-अलग केंद्रों का निरीक्षण कर परीक्षा का जायजा लिया। इसके बाद शाम में जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में प्रेसवार्ता में बताया कि 2027 तक झारखंड शत प्रतिशत साक्षरता वाले राज्यों में शामिल हो जाए, इसी लक्ष्य के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य के करीब 22 लाख लोगों को साक्षर बनाया जाएगा। इसके लिए कई स्तर पर तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर का जेएनएससी क्षेत्र शत प्रतिशत साक्षरत होने के करीब है। इसी प्रकार करनडीह एरिया भी 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करने जा रहा है। इसी साल सितंबर में इसे शत प्रतिशत साक्षरता वाला क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसमें जरूरत पड़ने पर निजी स्कूलों का सहयोग भी लिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तपर पर कार्ययोजना बनायी जा रही है। बताया गया कि जो भी निरक्षर हैं, उन्हें पहले जनचेतना केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिसमें उन्हें लिखने-पढ़ने का हुनर सिखाया जाता है और इसके बाद परीक्षा ली जाती हे जो इसमें पास होता है उसे साक्षर माना जाता है। इस प्रेसवार्ता में जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष पांडे व उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी मनोज कुमार निराला भी उपस्थित थे।
Read Also: Jharkhand Contract Teachers News : संविदा शिक्षकों के प्रति सरकार गंभीर नहीं : प्रदेश अध्यक्ष

