Jamshedpur : जमशेदपुर के युवा कारोबारी कैरव गांधी के अपहरण की घटना के तीसरे दिन भी अब तक पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है। पुलिस अब तक हवा में ही तीर चला रही है। एसएसपी ने कैरव को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए चार टीमें गठित की हैं। इनमें से कुछ टीमें यूपी और बिहार भी भेजी गई हैं। फिलहाल पुलिस हवा में तीर चला रही है। पुलिस को इस मामले में अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। कैरव गांधी के अपहरण की वजह से जमशेदपुर के कारोबारियों में दहशत का माहौल है।

इसके अलावा, पुलिस सोनारी के सीएच एरिया, सोनारी, बिष्टुपुर आदि इलाकों में सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है। इसके जरिए पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या कैरव गांधी अपनी क्रेटा कार लेकर उधर से गुजरे थे। क्या कोई उनका पीछा कर रहा था। पुलिस का मानना है कि यह घटना किसी संगठित गिरोह का काम है। गिरोह के सदस्यों ने बड़ी बारीकी से कैरव गांधी की रेकी की है और इसके बाद ही उनका अपहरण किया है।
यह भी हो सकता है कि इस घटना से जुड़े बदमाश पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए फोन कर रहे हों। जिस नंबर से फोन आया है उसे पुलिस ट्रेस करने के काम में जुटी हुई है। इन दिनों तकनीक काफी आगे है। कहीं भी रह कर कंप्यूटर के जरिए भी इंटरनेशनल कॉल की जा सकती है।
गौरतलब है कि मंगलवार को कैरव गांधी का अपहरण कर लिया गया था। उनकी कार सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा के पास मिली थी। यहीं कैरव का मोबाइल फोन भी मिला था। कैरव उस दिन तकरीबन 12 बजे घर से कार से निकले थे। उन्होंने घर वालों को बताया था कि बिष्टुपुर एसबीआई किसी काम से जाना है। इसके बाद आदित्यपुर में अपनी कंपनी में जाना है। दोपहर दो बजे तक घर वापसी की बात कही थी। वह जब घर वापस नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उन्हें फोन लगाया। फोन स्विच ऑफ मिलने पर परिजनों को चिंता बढ़ गई थी।
इसके बाद पुलिस से संपर्क किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की तो रात आठ बजे पता चला कि कांदरबेड़ा में कार खड़ी है। यहां से कार बरामद की गई। पुलिस का आकलन है कि मंगलवार को घर से निकलने के बाद रात आठ बजे से पहले किसी भी समय उनका अपहरण किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। कहा जा रहा है कि कैरव गांधी को छोड़ने के लिए अपहरणकर्ताओं ने इंटरनेट कॉल की है।

