Jamshedpur : जमशेदपुर में इन दिनों बड़े पैमाने पर वन्यजीव तस्करी की जा रही है। वन विभाग इस तस्करी को रोकने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। विभाग के अधिकारी यदा-कदा तस्करों के चमचों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज देते हैं। कुछ वन्य जीव बरामद कर लिए जाते हैं। मगर, वन्यजीव तस्करी की बड़ी मछलियां अब भी पकड़ से बाहर हैं। इसी वजह से लौहनगरी में वन्यजीव तस्करी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
जमशेदपुर में इन दिनों तोतों का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। साकची इलाके में ऐसे तोते बेचे जाते हैं। जमशेदपुर में तोतों और अन्य वन्यजीवों का कारोबार इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है।
इसकी जानकारी रांची में वन विभाग के बड़े अफसरों को मिल गई है। इसके बाद आला अधिकारियों ने डीएफओ को सूचना दी कि साकची में एक नेटवर्क काम कर रहा है। रांची से मिले इनपुट के आधार पर वन विभाग को कार्रवाई करनी थी। इसी क्रम में विभाग ने साकची गोलचक्कर पर वन विभाग के कर्मचारियों को तैनात कर दिया। देर रात तस्कर यहां पहुंचे और वन विभाग के अधिकारियों ने तीन तस्करों को दबोच कर इनके पास से 70 तोते, एक बड़े मोर का पंख और हिरण की एक सींग बरामद की है।
बताया जा रहा है कि वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल से इनपुट मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने साकची गोलचक्कर के पास देर रात छापेमारी की थी। इसी क्रम में एक ऑटो को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें अभय गुप्ता नामक युवक के पास से करीब 35 तोते बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान अभय की निशानदेही पर गुड्डू और समीर अंसारी को भी हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार दोनों आरोपियों के पास से लगभग 35 और तोते, एक बड़ा मोर का पंख और हिरण का सींग बरामद हुआ। इस तरह कुल मिलाकर 70 से अधिक तोते जब्त किए गए हैं। सभी तोतों को सुरक्षित रेस्क्यू कर वन विभाग की निगरानी में रखा गया है।
मामले को लेकर डीएफओ सबा आलम ने बताया कि वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त की सूचना मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई की गई। तीनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।
वह इस बात का जवाब नहीं दे पाए कि यह तस्कर तोते और हिरण की सींग कहां से लाए हैं। सूत्र बताते हैं कि मामले की लीपापोती की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। लोग वन विभाग पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि वन विभाग इन तस्करों की जड़ तक जाए। बड़ी मछलियों पर भी कार्रवाई करे। तभी तस्करी की घटनाओं पर रोक लग सकती है। जब तक विभाग बड़ी मछलियों पर कार्रवाई नहीं करेगा। यह लोग इसी तरह वन्य जीवों की तस्करी कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते रहेंगे। जमशेदपुर में लेपर्ड की खाल की भी तस्करी होती है। यही नहीं, सफेद मूंगा की भी तस्करी का जमशेदपुर हब बना हुआ है।
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