Jamshedpur (Jharkhand) : मानगो नगर निगम के अंतर्गत गोकुलनगर में रहने वाले लगभग 350 परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। वन विभाग द्वारा इन परिवारों को अपने मकान खाली करने का नोटिस जारी किया गया है, जिससे बस्तीवासियों में आक्रोश है। इस नोटिस के संदर्भ में शुक्रवार को जमशेदपुर पूर्वी के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें लोगों ने इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
40 वर्षों से रह रहे हैं बस्तीवासी, जीवनभर की पूंजी दांव पर
ज्ञापन में बस्तीवासियों ने कहा कि वे और उनके पूर्वज पिछले 40 वर्षों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। उन्होंने अपनी वर्षों की मेहनत और जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर यहां घर बनाए हैं और इसी से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। गोकुलनगर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की बस्ती है, जहां ज्यादातर परिवार दिहाड़ी मजदूरी, रिक्शा चलाने, घरेलू कामकाज और छोटी-मोटी दुकानों जैसे कार्यों पर निर्भर हैं।
बिना सूचना दिए नोटिस, तोड़फोड़ भी शुरू
बस्तीवासियों का आरोप है कि हाल ही में वन विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना या परामर्श के उनके घरों को तोड़ने संबंधी नोटिस जारी कर दिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय न केवल उनके लिए पीड़ादायक है, बल्कि अमानवीय और असंवैधानिक भी प्रतीत होता है। नोटिस देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि विभाग ने दो या चार घरों को ही नोटिस दिया है, जिनमें से एक मकान को तोड़ भी दिया गया है।
उपायुक्त से हस्तक्षेप की गुहार
शुक्रवार को गोकुलनगर के बस्तीवासी उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों पर ध्यान देने का आग्रह करने आए थे। उन्होंने उपायुक्त से नोटिस की पुन: समीक्षा करने और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देने का निवेदन किया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि यदि किसी कारणवश विस्थापन आवश्यक हो, तो उनके पुनर्वास के लिए समुचित और ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बस्तीवासियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में एक संयुक्त बैठक आयोजित कर इस समस्या का संवेदनशीलता से समाधान निकालने की भी मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग ने अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के बस्तीवासियों को नोटिस देना शुरू कर दिया और घर खाली करने के लिए मात्र एक हफ्ते का समय दिया है, जो कि असंभव है।
बस्तीवासियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपनी जान दे देंगे, लेकिन अपने घर खाली नहीं करेंगे, जहां वे पिछले 40 वर्षों से अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने बस्तीवासियों को आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को गंभीरतापूर्वक देखेंगे और जल्द ही उचित कार्रवाई करेंगे।

