Home » Jharkhand Bureaucracy :  नौकरशाही : मैडम सर की गाड़ी

Jharkhand Bureaucracy :  नौकरशाही : मैडम सर की गाड़ी

Jharkhand Bureaucracy : सरकारी पैसे की बंदरबांट कोई नई बात नहीं है। इस कला को सीखने में ज्यादा समय नहीं लगता। हाकिम यह बखूबी जानते हैं कि सरकारी मद में खर्च दिखाकर निजी काम कैसे निकालते हैं? एक साहब ने अपनी मैडम के लिए कुछ ऐसा ही इंतजाम किया है। उनका यह प्रयोग नौकरशाही के गलियारे में खासा चर्चा में है। आखिर क्या चल रहा है अंदरखाने, जानें द फोटोन न्यूज के एक्जीक्यूटिव एडिटर की कलम से।

by Dr. Brajesh Mishra
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jharkhand Bureaucracy : गुरु के घर के पास घंटे-घड़ियाल बज रहे थे। गेट के बाहर लंबी-लंबी गाड़ियों की कतार थी। पता चला कि रामनवमी पर नजदीक के मंदिर में पूजा चल रही है। सामने मंच पर छऊ का मंचन हो रहा है। विशेष मौके पर कई नौकरशाह हरि दर्शन के लिए आए थे। प्रसाद के बाद कुछ सपरिवार गुरु का आशीर्वाद लेने पहुंच गए। माहौल देखकर लगा, आज काम की बात नहीं निकलेगी। भारी मन से बस गुरु की बैठकी में बैठ गया। नौकरशाहों का मजमा पहले से ही लगा था। यह जमात अपने ही कुनबे के गैरमौजूद सूरमाओं की परतें उघाड़ने में मशगूल थी।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : पेपरवेट वाली चर्चा

एक जनाब डीएमएफटी का हाल बता रहे थे। वनांचल के कई जिलों में सरकारी धन की लूट की गाथा सुना रहे थे। बात स्टील सिटी में हुए कथित भ्रष्टाचार से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे वार्ता का यह सफर लौह अयस्क वाले मंडल तक पहुंच गया। दूसरे ने प्रमंडल के एक जनपद की कमान संभाल रहे हाकिम का हाल सुनाया। बताया कि साहब की मैडम ‘कॉरपोरेट लेडी’ हैं। साहब को बड़ी कुर्सी मिलने के बाद मैडम का जलवा सातवें आसमान पर है। उनकी सुविधा के लिए साहब ने डीएमएफटी का सहारा लिया है। एक बड़ी गाड़ी मैडम सर को लाने-ले जाने में लगाई गई है।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : मदिरालय के ‘मुल्जिम’

किसी को कोई शक न हो, इसके लिए गाड़ी पर दूसरे महकमे का स्टीकर तक लगा दिया गया है। मैडम पूरे शान से सरकारी सवारी से प्राइवेट काम कर रही हैं। यह अलग बात है कि इन साहब की यह चतुराई छिपी नहीं रह सकी। खुसुर-पुसुर के साथ रायता फैल गया। कई लोगों ने बड़ी सवारी का वीडियो तक बना लिया है। चर्चा अभी चल ही रही थी कि गुरु की नजर अचानक अटक गई। देखा आंतरिक वार्ता में बाहरी शख्स मौजूद है। तपाक से वार्ताकार को रोका। कहा, अरे कुछ बोलने से पहले एक बार नजरें भी घुमा लिया करो।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : ‘धूल और कांटे’

अखबार वाले भी आसपास मौजूद हैं। गुरु का हस्तक्षेप किसी हथौड़े की तरह पड़ा। कथा सुना रहे नौकरशाह का चेहरा लाल हो गया। माहौल की खामोशी भांपकर हालात को गुरु ने ही फिर संभाला। बोले- कोई नहीं, सब अपने लोग हैं। कमरे की बात कमरे तक ही रहेगी। गुरु के आश्वासन के बाद फिर हंसी-मजाक का दौर चल पड़ा, लेकिन बातचीत में न पहले वाला प्रवाह रहा और न ही सहजता का भाव। अब जोर इस बात पर था कि यह सब तो सामान्य सी बात है।

Read Also- Jharkhand Bureaucracy :  नौकरशाही : वायरल ऑडियो वाली कहानी

चाहे स्टील नगरी में हो या छऊ वाले मुहल्ले में। थोड़ा इधर-उधर करके तो चलना ही पड़ता है। सभी चलते हैं। हालांकि बात ही बात में अपना काम तो हो चला था। बस मन के भीतर एक द्वंद्व था, डीएमएफटी का ऐसा उपयोग? यह तो जिलों में विकास की गति के लिए होता है। इन साहब को क्या सूझी कि यहां दिमाग लगा दिया? मन ही मन जवाब मिला- आखिर मैडम सर की सुख-सुविधा भी तो साहब की जिम्मेदारी है। उनकी खुशी का भी तो ध्यान रखना है। सो, गुरु के हाथ जोड़े, रामनवमी पर निकलीं रामजी की सवारियों को देखते-देखते निकल पड़ा।

Read Also: Jharkhand Bureaucracy :  नौकरशाही : वायरल फोटो वाले ‘साहब’

Related Articles

Leave a Comment