RANCHI : झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए जा रहे है। हॉस्पिटलों में सुविधा भी बढ़ाई जा रही है। हाईटेक मशीन और टेक्नीशियन भी बहाल किए जा रहे हैं। लेकिन, मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों की राज्य में भारी कमी है। इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि राज्य में फिलहाल औसतन 7500 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है, जबकि डब्लूएचओ के मानकों के अनुसार हर 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। इस बड़े अंतर से साफ है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव है।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। यहां डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं कई मामलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग भले ही अस्पतालों में सुविधाओं और व्यवस्थाओं में सुधार का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी कई सवाल खड़े कर रही है।
केवल सीटें बढ़ाने से नहीं होगा समस्या का समाधान
राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई है, ताकि भविष्य में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीटें बढ़ाने से समस्या का तुरंत समाधान नहीं होगा। एक एमबीबीएस डॉक्टर बनने के बाद उसे स्पेशलिस्ट बनने में कम से कम 3 साल का समय लगता है। वहीं सुपर स्पेशलिस्ट बनने में करीब 5 साल का अतिरिक्त समय लगता है। ऐसे में वर्तमान कमी को पूरी तरह भरने में कई साल लग जाएंगे। इतना ही नहीं यहां के मेडिकल कालेजों से पास आउट हो जाने के बाद भी डॉक्टर अपनी सेवा नहीं देना चाहते। वे दूसरे राज्यों का रूख कर रहे है। ऐसे में इस गैप को भरना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
आईएमए ने की विसंगति दूर करने की मांग
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की तैनाती बेहद सीमित है। कई जगहों पर एक ही डॉक्टर को कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, जिससे इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इतना ही नहीं कई जगहों पर डॉक्टरों की पोस्टिंग कर दी जाती है लेकिन उनके रहने से लेकर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते। आईएमए के सचिव डॉ प्रदीप सिंह ने बताया कि अगर सरकार सुविधाएं उपलब्ध कराए और विसंगतियों को दूर करें तो कोई डॉक्टर अपना घर छोड़कर दूसरे राज्य क्यों जाना चाहेगा। यहां के डॉक्टरों को अच्छा पेमेंट नहीं मिलता। लेकिन प्राइवेट के डॉक्टरों को बुलाकर लाखों रुपए दिए जा रहे है। इसके अलावा डॉक्टरों की पोस्टिंग जहां भी हो उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाए तो वे बेहतर सेवा दे सकते है। इसके पहले भी 70 से अधिक डॉक्टरों की बहाली की गई थी। लेकिन उसमें से डेढ़ दर्जन ने ही ज्वाइन किया।

