
रांची : कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद झारखंड सरकार ने राज्यभर में पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं। दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने, पंडालों की मजबूती सुनिश्चित करने और आगजनी या भगदड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को पूजा पंडालों का दोबारा निरीक्षण करने तथा सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को तत्काल दूर कराने का निर्देश दिया है।
पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) नरेंद्र कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देश में पंडालों की संरचना, बिजली के तारों, अग्नि सुरक्षा, प्रवेश और निकास द्वार तथा भीड़ प्रबंधन की विशेष जांच करने को कहा गया है। इसके साथ ही मेला क्षेत्रों में लगाए गए झूलों की मजबूती की भी जांच की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य पूजा के दौरान किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकना और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
कोलकाता हादसे के बाद दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा की होगी जांच
कोलकाता के चोरबागान पंडाल में 17 अक्टूबर को बारिश से बचने के दौरान भगदड़ की घटना हुई थी। इस हादसे में 19 लोगों की मौत और 25 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इस घटना के बाद झारखंड में भी पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने पंडालों की संरचनात्मक मजबूती की जांच पर विशेष जोर दिया है। निर्देश के अनुसार, 16 अक्टूबर को हुई तेज बारिश के कारण पंडालों में लगाए गए बांस की नींव कमजोर हो सकती है। आसपास की मिट्टी गीली होने से बांस के खंभों की पकड़ प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में पंडालों के खंभों, बांस-पटरियों, कीलों और रस्सियों की स्थिति की जांच करना जरूरी होगा।
इसके अलावा, पंडालों के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री में टूट-फूट या ढीलापन मिलने पर उसे तत्काल ठीक कराने को कहा गया है। मेला क्षेत्रों में लगे झूलों की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं और मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार का खतरा न हो।
भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
झारखंड के सभी जिलों में दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। जिला प्रशासन और पूजा समितियों के बीच समन्वय स्थापित कर छोटे-बड़े पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ पर लगातार नजर रखी जाएगी। इसके लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की सहायता लेने को कहा गया है।
किसी पंडाल या उसके आसपास भीड़ का दबाव बढ़ने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर लोगों की आवाजाही के रास्तों में बदलाव किया जाएगा, ताकि एक स्थान पर अत्यधिक भीड़ जमा न हो। पंडालों के भीतर श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित क्षमता के अनुरूप रखने और प्रवेश द्वार पर भीड़ को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है।
लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को लगातार सुरक्षा संबंधी निर्देश देने को कहा गया है। श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और पुलिस तथा प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं का पालन करने की अपील भी की जाएगी।
अग्नि सुरक्षा, बिजली व्यवस्था और पंडाल की मजबूती के प्रमाण पत्र जरूरी
पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार, पूजा पंडालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अग्निशमन विभाग से अग्नि सुरक्षा, लोक निर्माण विभाग से पंडाल की मजबूती और बिजली विभाग से विद्युत व्यवस्था से संबंधित प्रमाण पत्र लेना होगा।
बिजली के तारों और उनके जोड़ की विशेष जांच की जाएगी। खुले तार या असुरक्षित विद्युत जोड़ मिलने पर उन्हें दुरुस्त कराने की आवश्यकता होगी। पंडालों में आग लगने की आशंका को कम करने के लिए अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
इसके साथ ही आपातकालीन सेवाओं के लिए रास्ते खुले रखने का निर्देश दिया गया है। एंबुलेंस और अग्निशमन वाहनों के आने-जाने वाले मार्गों पर किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए। इन रास्तों पर दुकानें, अस्थायी स्टॉल या विज्ञापन पट्ट लगाकर आवागमन बाधित नहीं किया जा सकेगा।
प्रवेश और निकास द्वार अलग रखने के निर्देश
दुर्गा पूजा पंडालों में भगदड़ की आशंका कम करने के लिए प्रवेश और निकास द्वार अलग-अलग रखने तथा दोनों ओर पर्याप्त चौड़ा रास्ता सुनिश्चित करने को कहा गया है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखने और अचानक भीड़ बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
पंडालों के आसपास यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए जिला प्रशासन के समन्वय से प्रत्येक पूजा पंडाल के 200 मीटर के दायरे को वाहन निषेध क्षेत्र घोषित करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य पंडाल के आसपास वाहनों की भीड़ कम करना और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता उपलब्ध रखना है।
प्रमुख चौराहों, पंडालों के बाहर और लंबी कतारों वाले स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। जरूरत के अनुसार त्वरित कार्रवाई दल और आरक्षित पुलिस बल को भी तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक पूजा पंडाल में महिला पुलिसकर्मियों की अलग से तैनाती पर भी जोर दिया गया है, ताकि महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित की जा सके।
वायरलेस संचार और सुरक्षा संबंधी सूचना पट्ट लगाने के निर्देश
पूजा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों के बीच त्वरित संचार व्यवस्था सक्रिय रखने को कहा गया है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को वायरलेस यंत्र उपलब्ध कराने और सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, पूजा पंडालों और आसपास के प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा संबंधी अपील तथा आवश्यक निर्देशों वाले सूचना पट्ट लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से लोगों को भीड़ से बचने, निर्धारित रास्तों का उपयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति की सूचना पुलिस को देने के लिए जागरूक किया जाएगा।
सभी जिलों को सुरक्षा जांच की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपनी होगी
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखंड सरकार के अपर सचिव के पत्र के आलोक में पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत सभी जिलों में अग्नि सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, पंडालों की संरचनात्मक मजबूती, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन निकास मार्गों की जांच की जाएगी।
जांच के दौरान सामने आने वाली कमियों को बिना देरी दूर कराने पर जोर दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। इसके बाद की गई कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधार की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय, झारखंड, रांची को उपलब्ध करानी होगी।

