
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने रांची, दुमका, जमशेदपुर और हजारीबाग में स्थान चिह्नित किया
रांची : झारखंड की जेलों में बंदियों को केवल बंद दीवारों के भीतर रखने के बजाय सुधार और पुनर्वास का बेहतर अवसर देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य की चार केंद्रीय जेलों में अब ओपन/ सेमी-ओपन बैरक स्थापित किये जायेंगे। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार (रांची), केंद्रीय कारा दुमका, केंद्रीय कारा घाघीडीह (जमशेदपुर) और लोकनायक जयप्रAdd New Tableकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग में इसके लिए स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
यह व्यवस्था ऐसे बंदियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनमें सुधार की संभावना है और जिन्हें नियंत्रित वातावरण में सामान्य जीवन के करीब लाने की जरूरत है। ओपन/सेमी-ओपन व्यवस्था में जेल प्रशासन की निगरानी बनी रहती है, लेकिन बंदियों को पारंपरिक बंद बैरक की तुलना में अधिक खुला वातावरण, काम-काज और पुनर्वास आधारित गतिविधियों से जोड़ने की गुंजाइश रहती है। हालांकि, इसका वास्तविक संचालन कैसे होगा, यह अलग से जारी होने वाली एसओपी में तय किया जाएगा।
32 जेलों में 17,671 की क्षमता
उपलब्ध एनसीआरबी के 2024 के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में 32 जेल थीं। इनमें सात केंद्रीय जेल, 16 जिला जेल, सात उपकारा, एक बोर्स्टल स्कूल और एक विशेष जेल शामिल थे। इन सभी जेलों की कुल क्षमता 17,671 बंदियों की थी। 2024 में इन जेलों में 16,201 बंदी थे। इनमें सबसे बड़ी संख्या विचाराधीन बंदियों की थी। कुल 11,232 बंदी ट्रायल का इंतजार कर रहे थे।
जेलों में भीड़ का दबाव सभी जगह एक जैसा नहीं है। 2024 में जिला जेलों में ऑक्यूपेंसी करीब 114 प्रतिशत रही, यानी निर्धारित क्षमता से अधिक बंदी थे। वहीं केंद्रीय जेलों में यह करीब 90.5 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि जेल व्यवस्था में सिर्फ नयी क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि बंदियों के वर्गीकरण, स्थानांतरण, सुधार और पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
चार जेलों में कहां बनेगा बैरक
होटवार : बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के सेक्टर-13 में बंदी कक्ष संख्या 13/बी और 13/डी को ओपन/सेमी-ओपन बैरक के लिए चिह्नित किया गया है। इनका आकार 60 फीट × 20 फीट है।
दुमका : केंद्रीय कारा में मुख्य गेट के बगल स्थित बैरक को इसके लिए चुना गया है। इसकी लंबाई 25 फीट, चौड़ाई 18 फीट और ऊंचाई 10.5 फीट है।
घाघीडीह : जमशेदपुर केंद्रीय कारा के उत्तर-पूर्व में स्थित आरुणि खंड के दो कक्षों का चयन किया गया है। ये मुख्य गेट से करीब 275 मीटर दूर हैं। दोनों कक्ष करीब 20 मीटर × 6.8 मीटर के हैं।
हजारीबाग : लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा के आंतरिक परिसर में स्थित दो मंजिला सेक्टर-2 को ओपन/सेमी-ओपन बैरक के लिए चिह्नित किया गया है। इसका आकार 74 फीट × 31 फीट है।
क्या होगा फायदा
ओपन/सेमी-ओपन बैरक का मूल उद्देश्य जेल से बाहर की दुनिया से पूरी तरह कटे रहने के बजाय बंदियों को सुधार, अनुशासन, जिम्मेदारी और समाज में दोबारा शामिल होने के लिए तैयार करना है। ऐसे नियंत्रित वातावरण में पात्र बंदियों को कौशल विकास, श्रम आधारित गतिविधियों और अन्य सुधारात्मक कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावना बढ़ती है। इससे जेल को केवल बंदी रखने की जगह के बजाय सुधार और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से लंबे समय से जेल में रह रहे और सुधारात्मक कार्यक्रमों के लिए उपयुक्त बंदियों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। हालांकि, कौन-कौन से बंदी इस व्यवस्था के पात्र होंगे, उन्हें कितनी स्वतंत्रता मिलेगी और निगरानी की क्या व्यवस्था होगी, इसका निर्धारण एसओपी के आधार पर किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य में पहल
ओपन/सेमी-ओपन बैरक की यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 26 फरवरी 2026 के न्यायादेश के आलोक में की गयी है। कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं निरीक्षणालय ने चार केंद्रीय काराओं में स्थान चिह्नित कर सरकार को अनुशंसा भेजी थी। इसके बाद सरकार ने इन स्थानों को औपचारिक रूप से ओपन/सेमी-ओपन बैरक के रूप में स्थापित कर दिया।
विभाग के अनुसार संचालन के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी होगी। योजना पर होने वाले खर्च के अनुसार सक्षम स्तर से प्रशासनिक स्वीकृति ली जाएगी। प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद ने 25 अगस्त 2026 की बैठक में भी मंजूरी दी थी।

