Home » JHARKHAND NEWS: राज्यपाल ने ओलचिकी शताब्दी समारोह में संताली संस्कृति को सराहा, बोले- राष्ट्रपति मुर्मू की सादगी व जनजातीय उत्थान की प्रतिबद्धता देश के लिए प्रेरणा

JHARKHAND NEWS: राज्यपाल ने ओलचिकी शताब्दी समारोह में संताली संस्कृति को सराहा, बोले- राष्ट्रपति मुर्मू की सादगी व जनजातीय उत्थान की प्रतिबद्धता देश के लिए प्रेरणा

by Vivek Sharma
राज्यपाल संतोष गंगवार
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोमवार को जमशेदपुर में आयोजित 22वें “परसी महा” एवं ओलचिकी लिपि शताब्दी समारोह के समापन अवसर पर कहा कि यह आयोजन महज एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, कला और अस्मिता का जीवंत प्रदर्शन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाषा और संस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि आने वाले कल की दिशा निर्धारित करने वाली ताकत हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने उनका हार्दिक स्वागत किया और उनकी सादगी, संवेदनशीलता तथा आदिवासी उत्थान के प्रति समर्पण को पूरे देश के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि साधारण परिवार से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा देश की बेटियों और युवा पीढ़ी के लिए एक जीवंत उदाहरण है।

राज्यपाल ने जमशेदपुर को केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों का मजबूत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस शहर की सामाजिक समरसता, श्रमिकों के सम्मान और सांस्कृतिक गरिमा की आधारशिला दूरदर्शी जमशेदजी टाटा ने रखी थी।परसी महा को संताली भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक जागरण का बड़ा महोत्सव करार देते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह लोक परंपराओं, स्मृतियों और सामुदायिक एकजुटता को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने याद किया कि वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया था, जो इस भाषा को राष्ट्रीय मान्यता देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। राज्यपाल ने गर्व के साथ बताया कि उस मंत्रिमंडल का हिस्सा होना उनके लिए गौरव की बात रही।

ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष पर पंडित रघुनाथ मुर्मू को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह लिपि केवल अक्षरों का संग्रह नहीं, बल्कि संताली समाज की सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक चेतना का प्रतीक है। इसने संताली भाषा को शिक्षा, साहित्य और अनुसंधान के क्षेत्र में ठोस आधार दिया है। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत@2047

’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि देश समावेशी विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, जिसमें आदिवासी भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन आने वाली पीढ़ियों में अपनी भाषा, लिपि और परंपराओं के प्रति गर्व और आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगे।

अंत में राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि लोक भवन झारखंड की जनजातीय भाषाओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संरक्षण में हमेशा सहयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि लोक भवन का द्वार राज्य के हर नागरिक के लिए खुला है और यह आमजन के हितों के संरक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा।

Related Articles