- प्रक्रिया संबंधी गंभीर त्रुटियों के सामने आने के बाद उठाया गया यह कदम
- नगड़ी की भूमि के मामले में तत्कालीन अंचल निरीक्षक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू
RANCHI : झारखंड के चर्चित भूमि घोटालों और विवादित नामांतरण मामलों की फाइलें एक बार फिर खुल रही हैं। नगड़ी के संजीवनी जमीन प्रकरण, रांची के जय प्रकाश उद्यान (जेपी उद्यान) जमीन मामले और चतरा जिले के हंटरगंज अंचल से जुड़े प्रकरण में सरकार ने पुनः विभागीय जांच कराने का निर्णय लिया है। प्रक्रिया संबंधी गंभीर त्रुटियों के सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। नगड़ी अंचल में चर्चित संजीवनी जमीन मामले में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की कर्मचारी आवासीय सोसाइटी की जमीन को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध निजी कंपनी के पक्ष में नामांतरण की अनुशंसा करने के आरोप में तत्कालीन अंचल निरीक्षक (अब सेवानिवृत्त) के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है।
राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नामांतरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत अभियोजन की स्वीकृति पहले ही प्रदान की जा चुकी है। चूंकि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए झारखंड पेंशन नियमावली के प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की जा रही है।
हेहल के तत्कालीन अंचलाधिकारी पर लापरवाही का आरोप
रांची के बहुचर्चित जय प्रकाश उद्यान जमीन मामले में भी पुनः विभागीय जांच का आदेश दिया गया है। हेहल अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी पर आदिवासी रैयत की भूमि का गैर-आदिवासी के नाम नामांतरण स्वीकृत करने, सरकारी भूमि की सुरक्षा में लापरवाही तथा भू-माफिया से मिलीभगत के आरोप लगाए गए थे। पूर्व में शुरू विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए थे। लेकिन, समीक्षा में पाया गया कि दस्तावेजी साक्ष्यों को विधिवत प्रदर्शित नहीं किया गया था। साक्ष्यों से जुड़े अभिलेख (एक्जीबिट) भी सही तरीके से प्रस्तुत और अंकित नहीं किए गए थे। इसके अलावा गवाहों का परीक्षण और प्रतिपरीक्षण भी नहीं कराया गया। इन प्रक्रिया संबंधी त्रुटियों के कारण दोबारा विधिसम्मत जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
हंटरगंज के तत्कालीन सीओ के विरुद्ध फिर जांच
चतरा जिले के हंटरगंज अंचल से जुड़े भूमि प्रकरण में भी पुनः विभागीय जांच का आदेश जारी किया गया है। आरोप है कि मौजा करमाली की गैरमजरूआ खास (जंगल-झाड़ी) भूमि को टांड़/रैयती भूमि दर्शाते हुए खनन पट्टा के लिए अनुशंसा की गई। साथ ही भूमि की प्रकृति संबंधी तथ्यों को छुपाने, जांच रिपोर्ट का समुचित पर्यवेक्षण नहीं करने और वरीय अधिकारियों को भ्रामक प्रतिवेदन भेजने का आरोप लगाया गया है।
पहले की विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए थे। लेकिन, दस्तावेजों के विधिवत प्रदर्शन, साक्षियों के परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण में कमी पाए जाने के कारण पुनः जांच का निर्णय लिया गया है। संबंधित अधिकारी को निर्धारित अवधि में जांच पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासनिक हलकों में बढ़ी सरगर्मी
संजीवनी, जेपी उद्यान और चतरा- तीनों मामलों में प्रक्रिया संबंधी खामियों के कारण दोबारा जांच शुरू होने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सरकार का संकेत है कि कानूनी प्रक्रिया को पूर्ण रूप से दुरुस्त कर ही अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचा जाएगा। अब नई जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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