Ranchi : झारखंड ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक निपटारे की नई मिसाल कायम की है। वर्ष 2025 में राज्य की अदालतों ने नए दर्ज मामलों से अधिक पुराने और नए मामलों का निपटारा किया, जिससे वर्षों से लंबित मुकदमों की संख्या में कमी आई। जहां पूरे देश में निपटारा दर 109 प्रतिशत रही, वहीं झारखंड ने 130 प्रतिशत की दर हासिल कर राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकल गया।
2025 में झारखंड में कुल 1,434 नए मामले दर्ज हुए, जबकि अदालतों ने 1,867 मामलों का निपटारा किया। यह आंकड़ा पिछली लंबित फाइलों को भी शामिल करता है। यह आंकड़े “पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन: अचीविंग द टिपिंग प्वाइंट टू जस्टिस फॉर चाइल्ड विक्टिम्स ऑफ सेक्सुअल एब्यूज” नामक रिपोर्ट में सामने आए हैं। यह रिपोर्ट सी-लैब फॉर चिल्ड्रन द्वारा, भारत चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल के अंतर्गत जारी की गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर 2025 में 80,320 मामले दर्ज हुए, जबकि 87,754 का निपटारा हुआ। इससे देश का निपटारा दर 109 प्रतिशत पर पहुंच गया। 24 राज्य ऐसे हैं जिन्होंने 100 प्रतिशत से अधिक निपटारा दर दर्ज की है। सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने तो 150 प्रतिशत से भी अधिक दर हासिल की है। रिपोर्ट में इसे भारत की न्यायिक प्रणाली के लिए “निर्णायक मोड़” बताया गया है, जब अदालतें लंबित मामलों को घटाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही हैं।
हालांकि, झारखंड में अब भी कुछ पुराने मामले शेष हैं। राज्य में 16 प्रतिशत लंबित मामले 6 से 10 साल से लंबित हैं, इनमें 12 प्रतिशत पांच साल से, 19 प्रतिशत चार साल से, 23 प्रतिशत तीन साल से और लगभग 30 प्रतिशत दो साल से अधिक समय से लंबित हैं। यह संकेत देता है कि ऐसे मामलों की शुरुआती अवस्था में ही देरी बढ़ने लगती है।
रिपोर्ट ने सलाह दी है कि देशभर में 600 नई ई-पॉक्सो अदालतें स्थापित की जाएं, ताकि चार वर्षों में पूरे लंबित मामलों को समाप्त किया जा सके। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव दिया गया है, जिसे निर्भया कोष से भी वित्तपोषित किया जा सकता है।
भारत बाल संरक्षण के शोध निदेशक पुरुजीत प्रहराज ने कहा कि भारत अब बाल यौन शोषण मामलों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में निर्णायक मोड़ पर है। जब व्यवस्था पंजीकृत मामलों से अधिक निपटारा करने लगती है, तो यह इरादे से असर की दिशा में कदम होता है। इस रफ्तार को बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि बच्चों को समय पर न्याय मिल सके।
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि हर राज्य में साल दर साल 100 प्रतिशत से अधिक निपटारा दर बनाए रखी जाए, कम प्रदर्शन करने वाले न्यायिक क्षेत्रों को तकनीकी मदद दी जाए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कानूनी उपकरणों के उपयोग से मामलों की निगरानी और दस्तावेज विश्लेषण को तेज किया जाए।
मुख्य आंकड़े
झारखंड में नए मामले: 1,434
निपटाए गए मामले: 1,867
निपटारा दर: 130 प्रतिशत
राष्ट्रीय निपटारा दर: 109 प्रतिशत
झारखंड में लंबित मामलों का प्रतिशत
6-10 वर्ष से लंबित: 16 प्रतिशत
5 वर्ष से अधिक: 12 प्रतिशत
4 वर्ष से अधिक: 19 प्रतिशत
3 वर्ष से अधिक: 23 प्रतिशत
2 वर्ष से अधिक: 30 प्रतिशत
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें
- देशभर में 600 नई ई-पॉक्सो अदालतें स्थापित करें
- चार वर्षों में सभी लंबित मामले खत्म करने के लिए 1,977 करोड़ रुपये बजट
- निर्भया कोष से वित्तपोषण
- हर राज्य में 100 प्रतिशत से अधिक निपटारा दर बनाए रखें
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों से निगरानी तेज करें

