Ranchi : झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों की योग्यता को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नामांकन के समय हर उम्मीदवार को शपथ पत्र देना होगा कि निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक उनके दो से अधिक बच्चे नहीं हैं।
गोद ली हुई या जुड़वां बच्चे भी गिने जाएंगे
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि नगर विकास विभाग की पूर्व में जारी चिट्ठी को आधार मानकर इस नियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि यह अयोग्यता केवल उन मामलों में लागू होगी जहां तीसरी या उससे अधिक संतान का जन्म 9 फरवरी 2013 के बाद हुआ हो। यदि 2013 से पहले दो से अधिक संतानें थीं और बाद में संख्या नहीं बढ़ी, तो उम्मीदवार चुनाव लड़ने के पात्र रहेंगे। गोद ली गई संतान या जुड़वां बच्चे भी कुल संख्या में गिने जाएंगे।
फरवरी में चुनाव संपन्न कराना लक्ष्य
जिलों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरीनिर्वाचन तैयारियों की जानकारी देते हुए सचिव राधेश्याम प्रसाद ने कहा कि सभी जिलों में वार्डों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस संबंध में रिपोर्टें आयोग को प्राप्त हो रही हैं। जल्द ही सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर चुनाव तैयारियों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
आयोग का लक्ष्य फरवरी में चुनाव संपन्न कराना है। निकाय क्षेत्र के मतदाता किसी भी वार्ड से लड़ सकेंगेचुनावआरक्षण के कारण यदि कोई उम्मीदवार अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पा रहा है, तो उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित नगर निकाय का मतदाता सूची में शामिल कोई भी व्यक्ति उस निकाय के किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ सकता है। बशर्ते वह वार्ड में लागू आरक्षण नियमों का पालन करे।
आयोग के सचिव के अनुसार, महापौर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पदों के लिए उम्मीदवारों की योग्यता संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीदवार का उस नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य है, लेकिन वार्ड विशेष से बंधा नहीं। आरक्षण संबंधी शिकायतों के बाद यह निर्देश जारी किया गया है।राज्य में पहली बार सभी नगर निकायों के चुनाव एक साथ कराए जाने की तैयारी है।
आयोग ने पारदर्शिता और जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन नियमों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों में इन निर्देशों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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