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झारखंड में नये डीजीपी की नियुक्ति पर चल रहा मंथन, तीन नामों में से कोई एक होंगे फाइनल

चयन का आधार अधिकारी की योग्यता, सेवा रिकॉर्ड, पुरस्कार, उपलब्धियां और पुलिस नेतृत्व का अनुभव होगा।

by Anand Kumar
Jharkhand new DGP selection
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Ranchi: झारखंड पुलिस महकमे में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर महीनों से जारी संशय अब जल्द समाप्त हो सकता है। ऐसे आसार बनते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा को सेवा विस्तार देने संबंधी कोई प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाया गया है। ऐसे में राज्य सरकार 1 जनवरी 2026 से नया डीजीपी नियुक्त करने की दिशा में कदम उठा सकती है।

तदाशा मिश्रा, जो झारखंड की पहली महिला प्रभारी डीजीपी भी हैं, 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रही हैं। पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद नवंबर में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस समय वे गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। प्रभारी डीजीपी बनने के बाद उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नत किया गया था।

इन नामों पर चल रहा मंथन

डीजीपी चयन की रेस में तीन वरिष्ठ आईपीएसनए डीजीपी की दौड़ में मुख्य रूप से तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। पहले हैं अनिल पालटा (1990 बैच), जो वर्तमान में रेल महानिदेशक के पद पर तैनात हैं। दूसरे प्रशांत सिंह (1992 बैच) हैं, जो डीजी वायरलेस के पद पर कार्यरत हैं और तीसरे 1992 बैच के मनविंदर सिंह भाटिया जो डीजी होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज हैं। सूत्र बताते हैं कि इन अधिकारियों के नामों पर गहन मंथन चल रहा है। राज्य सरकार अपनी बनाई गई नियमावली के तहत चयन प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

जनवरी 2025 में झारखंड कैबिनेट ने ‘झारखंड पुलिस महानिदेशक (पुलिस बल प्रमुख) के चयन एवं नियुक्ति नियमावली’ को मंजूरी दी थी। उत्तर प्रदेश मॉडल पर आधारित इस नियमावली के तहत डीजीपी की नियुक्ति के लिए छह सदस्यीय नाम निर्देशन समिति का गठन होगा। समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।

चयन का आधार होगा…..

समिति के अन्य सदस्यों में मुख्य सचिव, यूपीएससी का नामित सदस्य, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का अध्यक्ष या नामित सदस्य, एक सेवानिवृत्त डीजीपी तथा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव शामिल होंगे।समिति कम से कम तीन और अधिकतम पांच नामों का पैनल तैयार करेगी। असाधारण स्थितियों में तीन से कम नाम भी सुझाए जा सकते हैं। चयन का आधार अधिकारी की योग्यता, सेवा रिकॉर्ड, पुरस्कार, उपलब्धियां और पुलिस नेतृत्व का अनुभव होगा।

अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का विवरण भी समिति को उपलब्ध कराया जाएगा।नियुक्त डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष होगा। यदि कोई अधिकारी केंद्र पर प्रतिनियुक्ति पर है, तो पैनल बनाने से पहले केंद्र को सूचित करना अनिवार्य होगा।

पहले डीजीपी चयन के लिए राज्य सरकार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल यूपीएससी को भेजती थी। यूपीएससी तीन नाम स्वीकृत कर वापस भेजता था और राज्य सरकार इन्हीं में से एक की नियुक्ति करती थी। नयी नियमावली लागू होने के बाद यह प्रक्रिया अब बदल चुकी है, जिससे राज्य को अधिक स्वायत्तता मिली है।पुलिस सूत्रों का कहना है कि नए साल से पहले या ठीक बाद में नई नियुक्ति की घोषणा हो सकती है, ताकि पुलिस महकमे में स्थिरता बनी रहे।

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